विश्व के मानचित्र पर फार्मा हब के रूप में उभरे औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के फार्मा जगत के लिए ड्रग टेस्टिंग लैब अगस्त तक मिल जाएगी। भवन तैयार है। 20 करोड़ की लागत से बनने वाली फार्मा टेस्टिंग लैब के उपकरणों की खरीद की निविदाओं की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
यदि कवायद सफल रही तो टेस्टिंग लैब से 600 के करीब फार्मा उद्योगों को इससे राहत मिलेगी। उद्यमियों को दवाओं की टेस्टिंग के लिए बाहरी राज्यों में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। बद्दी में बन रहे फार्मा टेस्टिंग लैब भवन बनकर तैयार हो गया है और यहां पर उपकरण खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इसमें कैथ लैब की सुविधा सहित एक्सपर्ट को बिठाने का कार्य प्रगति पर है। बीबीएन में बल्क ड्रग पार्क का निर्माण हो रहा है, जिसको देखते हुए ड्रग टेस्टिंग लैब का स्तर भी बढ़ाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि फार्मा जगत के लिए बल्क ड्रग पार्क और टेस्टिंग लैब मील का पत्थर साबित होंगे और इन दोनों की फार्मा हब बीबीएन को बहुत जरूरत महसूस होती थी, जो परवान चढ़ने जा रही है। भारत सरकार के फार्मा कलस्टर ग्रांट के तहत इसका निर्माण किया जा रहा है।
मंहगी मशीनरी के चलते बाहर करवाने पड़ते हैं टेस्ट
यह ड्रग टेस्टिंग लैब खासकर छोटे फार्मा उद्योगों के लिए बहुत हितकारी साबित होगी। ड्रग टेस्टिंग लैब में महंगे उपकरणों के अभाव में उन्हें अपनी दवाओं की जांच करवाने के लिए बाहरी राज्यों की लैब पर निर्भर होना पड़ता है। कई छोटे फार्मा उद्योग ऐसे भी हैं जिनके पास अपनी लैब नहीं है। उनके लिए भी यह लैब वरदान साबित होगी। इससे पूर्व चंडीगढ़, दिल्ली, हैदराबाद आदि की ड्रग टेस्टिंग लैब में दवाओं की गुणवत्ता की जांच होती है, जिसमें दवाओं की कंपोजिशन, मालक्यूल आदि की जांच की जाती है। इसी के बाद दवा को मार्केट में उतारा जा सकता है।
अंतिम पड़ाव पर है काम
हिमाचल ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष एचएन सिंगला ने कहा कि निश्चित तौर पर फार्मा जगत के लिए यह दोनों कार्य मील का पत्थर साबित होंगे। कैथ लैब निर्मित हो रही है और यहां विशेषज्ञ के लिए वार्ता चली हुई है, जबकि उपकरण खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रोसेस में है और बल्क ड्रग पार्क के खुलने के साथ टेस्टिंग लैब का स्तर बढ़ाया जा रहा है।