चिकनी व सरसा खड्ड़ का जल स्तर गिरा, किसान परेशान
खेतों में नमी न होने से खरपतवार की दवा का नहीं हो पा रहा छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ क्षेत्र में बारिश न होने से खरीफ की फसलें संकट में हैं। मक्की और धान की फसलें सूखने लगी हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। सूखे के कारण किसान न तो खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव कर पा रहे हैं और न ही खाद डाल पा रहे हैं। किसानों ने एक माह पहले मक्की और धान की फसलें लगाई थीं। मक्की में खरपतवार नाशक और यूरिया के छिड़काव का समय था, लेकिन पिछले दस दिनों से बारिश नहीं हुई है। इस बार लगाई गई डबल क्रॉस मक्की को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। दिन के समय धूप में मक्की के पौधे मुरझाने लगे हैं। धान की फसल के लिए भी सिंचाई का पानी कम पड़ रहा है। चिकनी खड्ड का जल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे किसान पानी नहीं उठा पा रहे हैं। पानी की कमी से धान के खेतों में घास उगने लगी है, जिससे किसानों को अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। खेड़ा के किसान अवतार सिंह ने बताया कि दस दिनों से बारिश न होने से मक्की की फसल मुरझा रही है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो खरपतवार मक्की से ऊपर निकल जाएंगे। यूरिया न मिलने से मक्की घास में दब जाएगी और फसल खराब हो जाएगी। ढांग उपरली के किसान सदा राम ने बताया कि चिकनी खड्ड में जल स्तर कम होने से धान के लिए पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ही देरी से बारिश हुई थी और अब दोबारा बारिश न होने से खरीफ की फसलें खराब हो रही हैं।
कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ संदीप गौतम ने बताया कि खरीफ की फसल के लिए बारिश का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे अपनी मक्की की सिंचाई कर सकते हैं। सिंचाई के बाद यूरिया और खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है।