दो घंटे इलाज के लिए तड़पती रही महिला मरीज, नहीं मिला इलाज
8 बजे सीएचसी में लाए थे महिला को, 10 बजे पहुंचा डेंटल डॉक्टर
मौत के बाद महिला का शव घर ले जाने को एंबुलेंस भी नहीं मिली
मजबूरन कार में ले जाना पड़ा परिजनों को शव
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला(सोलन)। दून विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के खोखले दावों की पोल खोल गई है। आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टा महलोग में आपात स्थिति में पहुंची महिला मरीज को आपातकाल में डॉक्टर तक नहीं मिला, जिससे महिला की मौत हो गई। केंद्र में जो स्टाफ मौजूद था उन्हें रेफर करने की पावर भी नहीं थी। दो घंटे तक अस्पताल में रहने के बाद महिला की हुई मौत। जानकारी के अनुसार बाड़ियां पंचायत की पपलोगी गांव की गुलाबी देवी (55) ब्रेस्ट कैंसर की मरीज थीं। शनिवार सुबह अचानक उसकी हालत गंभीर हो गई और वह तड़पने लगी। परिजन सुबह 8:00 बजे उसे सीएचसी पट्टा महलोग लेकर पहुंचे, इस दौरान कोई भी डॉक्टर वहां पर मौजूद ही नहीं था। परिजन इलाज की गुहार लगाते रहे, मगर न तो वहां पर मौजूद कर्मचारी मरीज को रेफर कर पाए और न ही इलाज दे पाए। मौके पर केवल लैब तकनीशियन, डेंटल तकनीशियन और मिडवाइफ ही तैनात थे। करीब दो घंटे बाद 10:08 बजे पर डेंटल डॉक्टर और फार्मासिस्ट मौके पर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मरीज ने दम तोड़ दिया।
हैरानी तो तब हुई जब परिजनों ने महिला की मौत के बाद शव को ले जाने के लिए शव वाहन या एंबुलेंस की मांग की। इस दौरान वहां पर एक एंबुलेंस तक नहीं मिली। मजबूरन परिजनों ने शव को अपनी कार में डाला और घर ले गए। इस व्यवस्था से आसपास के क्षेत्र के लोगों में रोष है।
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ग्रामीण हुए इकट्ठे, आंदोलन की दी चेतावनी
घटना की सूचना मिलते ही पट्टा के लोग मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार का दर्द साझा किया। पट्टा पंचायत के प्रधान पवन गुप्ता, वार्ड सदस्य पिंकी गुप्ता और राहुल चौहान, आपकी आवाज पट्टा महलोग के संचालक राजू शर्मा ने भी इस लापरवाही पर गहरा रोष जताया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सीएचसी पट्टा महलोग की दुर्दशा को तुरंत न सुधारा गया और दोषियों पर कार्रवाई न हुई, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेगी।
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स्थानीय निवासी पवन गुप्ता ने बताया कि लगभग 20,000 की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इस सीएचसी में कहने को दो-दो डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन उन्हें आए दिन डेपुटेशन पर दूसरी जगह भेज दिया जाता है। प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा खुद स्ट्रेचर पर पड़ा नजर आ रहा है।
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स्थानीय निवासी खेमचंद ने कहा कि इस अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। दो में से एक चिकित्सक को नालागढ़ डेपुटेशन पर भेजा है और दूसरे को काया कल्प ट्रेनिंग के लिए भेजा गया है। यहां पर आने वाली गंभीर रोगियों को तैनात स्टाफ रेफर भी नहीं कर सकता, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतें आ रही हैं।
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बरसात के चलते डॉक्टर सीएचसी में समय पर नहीं पहुंच पाया। 10:00 बजे वह सीएचसी पहुंचा, लेकिन मरीज पहले ही मर चुका था। बीएमओ का दावा है कि रोगी की घर पर ही मौत हो चुकी थी। महिला कैंसर से पीड़ित थी और वह नियमित तौर पर खुद भी उसकी जांच करते थे। - डाॅ. गुरमेल सिंह, बीएमओ
पट्टा की सीएचसी का भवन
पट्टा की सीएचसी का भवन