पिछले तीन दशकों से चूना पत्थर परियोजना की स्थापना के लिए प्रयासरत राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) को राज्य सरकार से खनन लीज प्राप्त हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। पर्यावरण, वन भूमि तथा खनन योजना सहित भारतीय इस्पात प्राधिकरण के साथ समझौता के लिए औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। इससे सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्क्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
चूना पत्थर खनन परियोजना के तहत 1342 बीघा सरकारी भूमि में खनन के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी प्रदान की है। गौर हो कि अर्की चूना पत्थर परियोजना में 3193 बीघा भूमि प्रस्तावित है। एनएमडीसी की लीज अवधि 2011 में पूरी हो चुकी थी जिसके नवीनीकरण के लिए 2009 में आवेदन किया गया था। अर्की स्थित एनएमडीसी कार्यालय प्रभारी डा. महेश वर्मा ने कहा कि छह वर्षों के प्रयासों के बाद राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के आवेदन को स्वीकृति मिली है।
गौरतलब है कि 50 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली अर्की चूना पत्थर परियोजना में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। 50 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली चूना पत्थर परियोजना में हर साल 37 लाख टन पत्थर इस्पात बनाने योग्य होगा जिसे भारतीय इस्पात प्राधिकरण एवं अन्य इस्पात इकाईयों को दिया जाएगा। जबकि शेष 13 लाख टन पत्थर का उपयोग सीमेंट बनाने में किया जाएगा।
अर्की की चूना पत्थर परियोजना को खनन लीज मिलने के साथ ही परिवहन एवं परियोजना क्षेत्र में सड़कों के निर्माण एवं पानी की उचित व्यवस्था के लिए भी राष्ट्रीय खनिज विकास निगम द्वारा 29 करोड़ रूपये की योजना तैयार कर ली गई है। अर्की चूना पत्थर परियोजना के समक्ष 1851 बीघा नीजि भूमि अधिग्रहण की चुनौती है जिसे राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण कर एनएमडीसी को सौंपा जाना है। उसके बाद अर्की चूना पत्थर परियोजना को पंख लग सकेंगे। इससे पहले केंद्रीय वन्य एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है। अब राज्य सरकार ने इसे खनन लीज को देने की हरी झंडी दे दी है। इससे सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।