विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान में लगातार वित्तीय कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय पर महत्वपूर्ण वैधानिक और न्यायालय के निर्देशों के तहत देनदारियां भी हैं। इस संबंध में 30 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की गई है।
आदेश में सभी विभागाध्यक्षों, डीन, निदेशकों, कार्यालय प्रमुखों और बाहरी केंद्रों व कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अनुसंधान सह-निदेशकों (एडीआर) को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सभी गैर-जरूरी खर्चों में तत्काल प्रभाव से कड़ाई से कटौती की जाएगी।
इनमें कार्यालय आकस्मिक व्यय, सामान एवं उपकरणों की खरीद, उपभोग्य वस्तुएं तथा मरम्मत और रखरखाव पर होने वाला खर्च शामिल है। अन्य व्यय भी कम किया जाएगा। खर्च केवल बेहद जरूरी परिचालन आवश्यकताओं के लिए ही किया जा सकेगा। अधिकारियों की पूर्व स्वीकृति के बिना गैर-जरूरी मदों पर कोई खर्च नहीं किया जाएगा।