टेपरा में श्रीमद्भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी।
दाड़लाघाट (सोलन)। नम्होल के टेपरा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथावाचक मदन शांडिल्य ने अंतिम दिन भक्त सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का प्रसंग सुनाया। वहीं, अंत में राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा का वर्णन किया गया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में रूप, यौवन, शक्ति (प्रभुत्व) और पद प्राप्त होते हैं, लेकिन यदि इनके साथ विवेक न हो तो यही गुण उसके पतन का कारण बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि विवेक न तो पढ़ाई से आता है और न ही डिग्रियों से। डिग्रियां ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन सही और गलत का निर्णय करने की क्षमता यानी विवेक अलग विषय है। इसके पास ये चारों हों और विवेक न हो, उसकी दुर्गति निश्चित है। उन्होंने कहा कि विवेक प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग सत्संग है। बिन सत्संग विवेक नहीं हो सकता।
आयोजक जगत शर्मा ने बताया कि आरती के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान सुख राम शर्मा, तुलसी राम शर्मा, लेख राम शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।