शहर में लोगों की सुविधा के लिए चलाई जा रही निजी मुद्रिका बसें बंद कर दी हैं। इस कारण हजारों लोगों को ऑटो की महंगी सवारी करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि निगम द्वारा चलाई जा रही बसें अपनी सेवाएं दे रही हैं लेकिन वह निधारित रूटों पर ही चल रही हैं। इस कारण लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह बस सेवा आंजी, रबौण, चंबघाट, कोटलानाला के लिए शुरू की थी।
हर दस पंद्रह मिनट बाद निजी मुद्रिका बसें रूटों पर चलती थीं लेकिन अब ऐसा न होने से लोगों को महंगी दरों पर ऑटो पर सफर करना पड़ रहा है। उधर प्रशासन का तर्क है कि बस बंद करने के संदर्भ में कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। बस यूनियन का कहना है कि ऑटो यूनियन की दादागिरी और झगड़ों के चलते बसें बंद की हैं। आटो यूनियन ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उल्टे बस ऑपरेटरों पर ही आरोप लगाएं हैं।
इसलिए शुरू की थी सेवा
ऑटो यूनियन के किराया बढ़ाने के विवाद और शहर में ऑटो यूनियन की हड़ताल के बाद प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए कम किराये पर निजी मुद्रिका बसों को चलाने के आदेश जारी किए। निजी बस संचालकों को इसकी मंजूरी देते हुए शहर में विभिन्न स्थानों तक का किराया 5 से 10 रुपये तक निर्धारित कर दिया। ऑटो में रबौन से सोलन, शामती से सोलन तक पहुंचने के 20 रुपये लग रहे है। निजी मुद्रिका बसों में महज 5 रुपये में पहुंचा जा सकता था। वर्तमान में एचआरटसी नियमित बसों के अलावा अतिरिक्त बसें भी मुद्रिका के रूप में शहर में दौड़ रही हैं। निजी मुद्रिका बसों को चलाने के फैसले से आम लोगों को राहत मिलने के साथ किराया भी
कम था।
ऑटो वाले रोज करते थे झगड़े : सिंह
शूलिनी निजी बस ऑपरेटर संघ के प्रधान मेहता रघुवेंद्र सिंह ने बताया कि निजी मुद्रिका बसें यात्रियों को काफी सस्ती पड़ रही थीं। यह बसें आम यात्रियों के लिए सफल रहीं। इसे देखते हुए ऑटो यूनियन ने लड़ाई झगड़े शुरू कर दिए। रोज-रोज के झगड़ों से तंग आकर निजी बस यूनियन ने सर्व सहमति से शहर के अंदर चलने वाली निजी मुद्रिका बस सेवा को बंद कर दिया।
बिना परमिट के चलाई जा रही बसें : शर्मा
शूलिनी ऑटो यूनियन के प्रधान जयदत्त शर्मा ने निजी बस ऑपरेटर यूनियन द्वारा लगाए सभी आरोपों को निराधार बताया। उल्टे बस चालकों पर ही माहौल को खराब करने का आरोप लगाया। कहा कि शहर के अंदर नियमों को ताक पर रखकर बिना परमिट के बसें चलाई जा रही हैं।
कट रही आम शहरवासी की जेब
शहर में निजी बस सेवाएं बंद होने से एक बार फिर ऑटो की सवारी मजबूरी बन गई है। यही नहीं भारी किराया वसूलने के बाद भी आटो में ओवरलोडिंग हो रही है। सुबह ऑफिस, स्कूल या काम पर जाने के लिए लोगों को गिनी चुनी एचआरटीसी की सेवा पर निर्भर रहना पड़ता है। यह बसें समय पर न मिलने से सवारियों को ऑटो वालों की मनमानी सहने को मजबूर होना पड़ता है। वहीं लोगों को एक बार फिर महंगी दरों पर ऑटो पर सफर करना पड़ रहा है।
लोग बोले, ऑटो में करना पड़ेगा महंगा सफर
बसें बंद होने को लेकर शहरवासियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बसें बंद होने से लोगों में रोष है। वरिष्ठ नागरिकों में आरसी गर्ग, शैलेंद्र पंवर, बिशेषर नाथ, जीडी भारद्वाज, एसके नैय्यर, सुरेश दत्ता, बीएन शर्मा, डॉ. एससी तिवारी, डॉ. आरके पठानिया, प्रो. यूएन खोसला और शशिकांत ने बताया कि बसों को दोबारा चलाने के लिए डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे। महिलाओं में सुमन, कमला देवी, ललिता गुप्ता, मीरा नेगी और ऊषा देवी ने कहा कि जब तक शहर में निजी मुद्रिका बसें दौड़ीं तब तक व्यवस्था सामान्य रही। लेकिन अब बसें बंद होने से चलते ऑटो का महंगा सफर करना पड़ रहा है। निगम की बसें बेहद कम हैं।
इन रूट पर चलती थीं निजी मुद्रिकाएं
निर्देशों के अनुसार मै. पीआरएल ट्रांसपोर्टर शामती को शामती-सपरून-रबौन, मै. मेहता ट्रांसपोर्ट कोआपरेटिव सोसायटी शामती को शामती-सपरून-रबौन तथा चंबाघाट-उपायुक्त कार्यालय चौक-सपरून तथा मै. भगनाल ट्रांसपोर्ट कोटलानाला को सपरून-उपायुक्त कार्यालय चौक-चंबाघाट मार्ग पर मुद्रिका बस सेवा आरंभ की थी।
रूट किराया यह आटो फेयर बचत
सपरूण से चंबाघाट वाया बाईपास 05 रुपये 10 रुपये 05 रुपये
उपायुक्त कार्यालय- चंबाघाट का 05 रुपये 10 रुपये 05 रुपये
सपरून - उपायुक्त कार्यालय 05 रुपये 10 रुपये 05 रुपये
सपरून से शामती 10 रुपये 15 रुपये 05 रुपये
रबौण पुराने बस अड्डे 07 रुपये 10 रुपये 03 रुपये
रबौन से उपायुक्त 05 रुपये 10 रुपये 05 रुपये
बसें बंद करने के नहीं
दिए हैं आदेश : डीसी
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि निजी मुद्रिका बसों को बंद करने की कोई भी सूचना प्रशासन ने जारी नहीं की है। बसें बंद होने के कारणों की जांच होगी। उन्होंने कहा कि शहर में निर्धारित रूटों पर पब्लिक की सहूलियत के लिए सस्ते किराए वाली निजी बस मुद्रिका चलाने को मंजूरी दी थी। इसके खिलाफ ऑटो यूनियन कोर्ट में चली गई। कोर्ट ने इस संबंध में प्रशासन से जवाब मांगा था। लिहाजा प्रशासन इस फैसले को आम जनता के हित में बताते हुए जवाब दायर कर दिया है। न तो प्रशासन को कहीं से बसें बंद करने के निर्देश आए और न ही प्रशासन ने कोई ऐसे आदेश जारी किए हैं।