पीलिया पांव पसारने लगा है। प्रशासन ने आईपीएच, स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद को चौकस कर दिया है लेकिन जमीनी हकीकत में विभाग कितने अलर्ट हैं, इसका अंदाजा सोलन के टैंक रोड पर स्थित 05-05 गैलन के दो टैंकों से लगाया जा सकता है।
शुक्रवार की ग्राउंड रिपोर्ट की असलियत भी सोलन की अफसरशाही पर प्रश्चिन्ह लगाने वाली है। अश्वनी और गिरि के संदेहजनक फिल्टर पानी को एकत्र करने के बाद मुख्य टैंक से आगे की सप्लाई दोनों टैंकों में पड़ रही है। यहां गंदगी साफ देखी जा सकती है। यहीं से शहर को सप्लाई रोजाना भेजी जा रही है।
वहीं प्रशासन और संबंधित विभागों की अलर्टनेस देखिए, टैंकों को साफ करने के बजाय जोर दिया जा रहा है तो क्लोरिनेशन को। हास्यास्पद है कि क्लोरिनेशन का जिम्मा एक मजदूर के हाथों दे दिया गया है। संबंधित अधिकारी शायद ही कभी यहां रुख करते हैं। 20 जनवरी को अश्वनी खड्ड का सूरते हाल बयां किया जा चुका है। 21 को खुले पड़े इन टैंकों की तस्वीर भी जगजाहिर हो चुकी है। जो खुले में पड़े हैं और जहां से शहर अश्वनी और गिरि का संदेहास्पद फिल्टर पानी पी रहा है। वहीं 23 के अंक में इस पानी में नालियों की गंदगी से भी अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन इसके बावजूद मुख्य स्रोतों में गंदगी का आलम बना हुआ है। ऐसे में सोलन की जनता उम्मीद लगाए तो आखिर लगाए किससे?
लाइव: 12 बजे: क्लोरीन की तेज गंध, झाग
दोपहर 12:00 बजे टैंक के इर्द गिर्द क्लोरीन की तेज गंध फैली हुई है। टैंक के आसपास कोई नहीं है। आम लोग इसके साथ लगते रास्ते से बेरोकटोक घूम रहे हैं। कॉलोनी के रास्ते से दाखिल होकर पहले टैंक में पानी सामान्य से बेहद कम है। टैंक में पानी भरा जा रहा था। इस पानी में सामान्य से अधिक सफेदपन है। बीच बीच झाग भी बनी हुई है। दूसरे टैंक में दूर से ही गंदगी देखी जा सकती है। कोक की बोतलें और लकड़ियां अंदर पड़ी हुई हैं। पानी में कई जगह हरापन और झाग के साथ गंदगी तैर रही है। वहां भी क्लोरीन की गंध देखी जा सकती है। पूछने पर बताया जाता है कि इन्हीं दोनो टैंकों से सुबह शहर को पानी की सप्लाई दी जानी है।
10 दिन में हम ही डालते हैं 50-60 कट्टे
टैंकों के पास कुछ महिलाएं बैठी हैं। अश्वनी और गिरि टैंक के ठीक किनारे एक कमरा है। अंदर सफेद रंग के क्लोरीन के 20-25 कट्टे पड़े हैं। देशबंधु कमरे में अकेले ड्यूटी दे रहे हैं। पूछने पर बताते हैं कि वह नगर परिषद में मजदूर हैं। करीब एक साल से ड्यूटी दे रहे हैं। आजकल डे ड्यूटी उनकी है। इवनिंग शिफ्ट में कोई और आता है। सफेद कट्टे के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इसमें क्लोरीन है। इसे टैंकों में डालता कौन है। जवाब मिलता है कि जिस मजदूर की ड्यूटी होती है। कितनी डालते हैं, कहते हैं, अंदाजे से। फिर पूछा कि 10 दिन में कितनी क्लोरीन लगती है। कहते हैं कि करीब 50 से 60 कट्टे तो लग ही जाते हैं। फिर सवाल किया जाता है कि टैंक कब साफ हुए। बताते हैं कि एक साल उन्हें हो गया, इस दौरान उन्होंने टैंक साफ होते नहीं देखे।