सीटू, एटक, इंटक और किसान सभा ने निकाली संयुक्त रैली
एसडीएम नालागढ़ के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़। सीटू, एटक, इंटक और हिमाचल किसान सभा के संयुक्त आह्वान पर नालागढ़ में जोरदार प्रदर्शन हुआ। इसमें विभिन्न ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और मिड-डे मील वर्करों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शन लोनिवि के विश्राम गृह से शुरू होकर नालागढ़ बाजार होते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुंचा, जहां केंद्र को ज्ञापन भेजा गया।
अखिल भारतीय किसान सभा के सचिव नरेश घई ने किसान-मजदूर एकता मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसलों का लाभकारी दाम, एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्ज से मुक्ति चाहते हैं। मजदूर अपने श्रम अधिकारों, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। केंद्र सरकार की नीतियां कृषि और श्रम क्षेत्र को बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंप रही हैं। चार श्रम संहिताओं से मजदूरों के वर्षों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं, जिसे किसान-मजदूर स्वीकार नहीं करेंगे। वक्ताओं ने बताया कि सरकार की नीतियों का लाभ बड़े कॉरपोरेट घरानों को मिल रहा है, जबकि किसान और मजदूर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इन जनविरोधी नीतियों का मुकाबला किसान-मजदूर एकता से ही संभव है।
जनसभा को संबोधन
जनसभा को हिमाचल प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष रवि शर्मा ने संबोधित किया। हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष यशपाल और इंटक के जिला अध्यक्ष श्याम लाल ठाकुर भी वक्ताओं में शामिल थे। एटक नालागढ़ के अध्यक्ष मोहन लाल, नछत्तर सिंह और एमडीएम वर्करों की ओर से मोहिंद्र सिंह ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि किसान और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई केवल ज्ञापन और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहेगी। इसे गांव-गांव और उद्योग-उद्योग तक ले जाकर व्यापक जनसंघर्ष में बदला जाएगा।
मजदूरों के अधिकारों का संघर्ष
सीटू महासचिव मोहित वर्मा ने नालागढ़ के औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हजारों मजदूरों की मेहनत से चलता है। परंतु आज भी बड़ी संख्या में मजदूर अपने कानूनी और सांविधानिक अधिकारों से वंचित हैं। मजदूरों को संगठित होने, यूनियन बनाने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने से रोकने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।