औद्योगिक शहर परवाणू में डेंगू और मलेरिया पांव पसारने लगा है। तीन डेंगू और तीन मलेरिया के केस आने से स्वास्थ्य विभाग अर्ल्ट हो गया है। यह सभी मामले परवाणू और इसके आसपास के इलाके के हैं। कामली गांव, टिपरा के अलावा हरियाणा के खेड़ा सीता राम में यह मामले ट्रेस हुए हैं। विभाग ने एहतियात बरतते हुए फॉगिंग और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है।
वायरल फीवर का प्रकोप भी डेंगू और मलेरिया के साथ परवाणू शहर को घेरे हुए है। पीड़ितों को अस्पताल से दवाइयां दे दी हैं और इलाज चल रहा है। वर्ष 2015 में जिला सोलन में डेंगू ने अपना प्रकोप बरसाया था और जिला सोलन में काफी बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज सामने आए। हालांकि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। पिछले वर्ष अकेले परवाणू शहर में सबसे अधिक लगभग 400 डेंगू के मामले सामने आए थे। ईएसआई परवाणू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद कपिल ने कहा कि मरीजों की हालत स्थिर है। डेंगूू के टेस्ट फ्री कर दिए हैं।
यह बरती जा रही सावधानी
परवाणू शहर मेें इन बीमारियों से बचने के लिए एहतियातन कदम उठाए हैं। फॉगिंग की जा रही है। दवाएं भी वितरित की जा चुकी हैं। शहर के हर सेक्टर में फॉगिंग पूरी हो चुकी है। ईएसआई अस्पताल परवाणू में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू के टेस्ट की निशुल्क व्यवस्था की है।
डेंगू के लक्षण
- तेज सिर दर्द और बुखार का होना ।
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
- आंखों के पीछे दर्द
- आम दवा से बुखार का न उतरना।
- गंभीर मामलों में नाक, मुंह, मसूड़ों से खून आना।
- चमड़ी में लाल दाग का पड़ना
सावधानियां और बचाव के तरीके
डेंगू से बचने के लिए लोगों को शरीर की सफाई का विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। साथ ही बुखार होने पर रक्त जांच से पहले कोई भी दवाई न लें। डेंगू फैलाने वाले मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए लोगों को चाहिए कि अपने आसपास पानी को रुकने न दें और सफाई व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दें। इसके साथ ही डेंगू मच्छर दिन के समय में लोगों को अपना शिकार बनाता है। लोगों को चाहिए कि दिन को शरीर को ढकने के लिए पूरे वस्त्र पहने। डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है और मरीज को बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल की गोलियां दें और इसके बावजूद भी बुखार न उतरे तो चिकित्सक की सलाह लें।