कुनिहार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते भक्तजन। संवाद
कुनिहार में दूसरे दिन सुनाई भगवान शिव की महिमा की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन बाल व्यास स्मृति भारद्वाज ने कथा के कई प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिलकर भगवान के निर्देशानुसार समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके। परंतु उस समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष निकला था। वह विष इतना विषैला था कि उससे समस्त जगत भीषण ताप से पीड़ित हो गया था। देव-दैत्य बिना पीए उसको सूंघते ही बेसुध से हो गए। तब भगवान ने अपनी शक्ति से उनको ठीक किया। देवों ने जब इस विष से बचने का उपाय पूछा तो भगवान ने कहा कि शिवजी से अगर आप सब लोग प्रार्थना करें तो वे इसका हल निकाल लेंगे। शिव जी महाराज ने देवताओं की प्रार्थना पर भगवान की प्रसन्नता के लिए उस हलाहल विष को पीने का निर्णय लिया। आपने अपने हाथों में उस विष को लिया व पी गए। समिति के अध्यक्ष रितेश जोशी ने बताया कि इस वर्ष जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर विशेष तौर पर श्री कृष्ण रासलीला की झांकियां विशेष आकर्षण होंगी । वहीं 16 अगस्त को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।