दोपहर 12 बजे तक सरकारी और उसके बाद निजी लैब में करवाने पड़े टेस्ट
लैब प्रबंधकों का तर्क, बारिश के कारण नहीं पहुंच पाई टेस्ट किट की सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में हो रही बारिश के कारण जलजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, इन बीमारियों में डॉक्टरों की ओर से सबसे अधिक लिखे जाने वाले लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) के लिए मरीजों को सरकारी लैब में लंबी कतारों का सामना करना पड़ा। क्रस्ना लैब में एलएफटी टेस्ट की सुविधा नहीं मिलने के कारण कई मरीजों को निजी लैब में पैसे देकर जांच करवानी पड़ी। आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भी सरकारी लैब की लंबी कतारों में जाने के लिए कहा गया।
दोपहर 12 बजे तक मरीज सरकारी लैब के बाहर टेस्ट करवाने के लिए खड़े रहे। इसके बाद कई मरीजों को निजी लैब का रुख करना पड़ा। क्रस्ना लैब के प्रबंधक के अनुसार, एलएफटी टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली किट शुक्रवार शाम हुई तेज बारिश के कारण समय पर लैब तक नहीं पहुंच पाई। इस कारण मरीजों के टेस्ट नहीं हो सके।
क्षेत्रीय अस्पताल की सरकारी लैब में दोपहर 12 बजे तक ही मरीजों के टेस्ट किए जाते हैं। इसके बाद मरीजों को क्रस्ना या निजी लैब में भेजा जाता है। अस्पताल में रोजाना करीब 70 से अधिक मरीज एलएफटी टेस्ट करवाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कई मरीजों को सैकड़ों रुपये खर्च कर निजी लैब में एलएफटी टेस्ट करवाना पड़ा।
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क्या होता है एलएफटी टेस्ट
एलएफटी टेस्ट लिवर की सेहत की जांच के लिए किया जाता है। इससे लिवर में सूजन, फैटी लिवर या किसी अन्य तरह के नुकसान का पता लगाया जाता है। पीलिया, गहरे रंग का पेशाब, लगातार थकान या पेट में दर्द होने पर भी डॉक्टर मरीजों को यह टेस्ट लिखते हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस जैसी पुरानी बीमारियों के इलाज की निगरानी के लिए भी एलएफटी कराया जाता है।
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लैब में एलएफटी टेस्ट किट उपलब्ध न होने के कारण मरीजों के टेस्ट नहीं हो सके। बारिश के कारण टेस्ट किट समय पर लैब तक नहीं पहुंच पाई थी। सोमवार से लैब में नियमित रूप से मरीजों के एलएफटी टेस्ट किए जाएंगे। - राजेश वर्मा, प्रबंधक, क्रस्ना लैब, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन