लोगों में डर का माहौल, शाम को घर में कैद हो जाते है बच्चे व महिलाएं
चांगरा कुम्हारां गांव में लगाया पिंजरा, हर रोज बांधी जाती है बकरी
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्र की पंचायतों में इन दिनों तेंदुए का खौफ बना हुआ है। बेहड़ी, रामशहर के धूहर और चमदार के चांगर कुम्हारां गांव में लोगों ने कई बार तेंदुए को देखा है। इन पंचायतों में लोग अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। शाम के समय महिलाओं और बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।
बेहड़ी, रामशहर और चमदार में कई लोगों ने तेंदुए को देखा है। रामशहर के धूहर गांव में तेंदुए ने दो बकरियों को शिकार बनाया है। वहीं, चमदार के मिसल गांव में श्याम लाल की बकरी को भी तेंदुए ने मार डाला। इसके अलावा शाम करीब 10 बजे के बाद चमदार से सटे जंगल में तेंदुओं के दहाड़ने की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
पूर्व वार्ड पंच रामानंद ने बताया कि बीते दिन चमदार से सटे जंगल में दो तेंदुए आपस में लड़ते रहे और काफी देर तक जोर-जोर से आवाजें करते रहे। इससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। लोगों ने पटाखे फोड़कर तेंदुओं को वहां से भगाया।
चमदार के चांगर कुम्हारां गांव में भी दहशत का माहौल है। पूर्व उपप्रधान देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में हरि किशन, ब्रज लाल, परवीन, सुमन लता सहित अन्य ग्रामीण वन रक्षक दीप राम से मिले थे और तेंदुए को पकड़ने की मांग की थी। इसके बाद वन विभाग ने गांव में पिंजरा लगाया, लेकिन अभी तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले करीब 10-12 दिनों से वे रोज रात को पिंजरे में बकरी या कुत्ता बांधकर आते हैं। शुरुआत में पिंजरे के आसपास तेंदुए के पैरों के निशान भी मिले थे, लेकिन अभी तक तेंदुआ पिंजरे में नहीं फंसा है।
रामशहर के परिक्षेत्र अधिकारी प्रेम सिंह पटियाल ने बताया कि क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिंजरा लगवा दिया है। पिंजरे में रोज बकरी बांधी जा रही है, लेकिन तेंदुआ अभी तक पकड़ में नहीं आया है।
उधर, वन मंडलाधिकारी अंशुल जैन ने बताया कि वन विभाग की ओर से प्रभावित पंचायतों में एडवाइजरी जारी की गई है। पंचायतों में पोस्टर लगाकर लोगों को तेंदुए के सामने आने पर बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि तेंदुआ सामने आने पर घबराएं नहीं और उसे देखकर तेज न भागें। तेंदुए पर नजर बनाए रखें और धीरे-धीरे सुरक्षित स्थान की ओर निकल जाएं।
उन्होंने कहा कि रात के समय जंगल के रास्ते से जाते हुए टॉर्च और डंडा साथ रखें तथा अकेले न जाएं। महिलाओं और बच्चों को शाम के समय अकेले बाहर न निकलने दें। पशुओं को अंधेरा होने से पहले गौशाला में बंद कर दें।