स्थानीय मंत्री, आईपीएच और जिला प्रशासन के अश्वनी खड्ड के स्वच्छ पानी के दावे पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) की टेस्टिंग रिपोर्ट में खरे नहीं उतरे हैं। अश्वनी खड्ड के ट्रीटेड और अन-ट्रीटेड पानी में पीलिया का वायरस मिला है। सोलन में अश्वनी खड्ड से शहर को सप्लाई होने वाले दूषित पानी की ग्राउंड रिपोर्ट ‘अमर उजाला’ के 20 जनवरी के अंक में प्रकाशित हुई थी। स्थानीय प्रशासन ने 23 जनवरी को अश्वनी के पानी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद पीलिया के मामले भी काफी संख्या में सामने आने लगे। हालांकि अश्वनी के पानी पर प्रतिबंध लगाने के बाद स्थानीय मंत्री और विधायक एवं आईपीएच के अधिकारियों ने प्रेसवार्ता और तमाम माध्यम से अश्वनी खड्ड के पानी को स्वच्छ करार दिया। लेकिन पानी की स्वच्छता की हकीकत पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट से खुल गई है। शिमला नगर निगम के मेयर ने वीरवार को प्रेसवार्ता के दौरान यह दावा किया है। हालांकि इस संदर्भ में सोलन का कोई संबंधित अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
29 को लिए थे सैंपल
पीलिया की चपेट में आए सोलन शहर में केंद्र की टीम ने 29 जनवरी शुक्रवार को दौरा किया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलाजी पुणे की आठ सदस्यीय टीम ने शहर के विभिन्न कोनों से आठ स्थानों से पानी के सैंपल एकत्र किए। वहीं पीलिया के ग्रस्त रोगियों के खून के नमूने भी जांचे। इसमें अश्वनी के ट्रीटेड और अनट्रीटेड पानी के सैंपल भरे गए।
पानी की टंकियों में अभी तक वायरस
अश्वनी खड्ड से शहर के जिन क्षेत्रों की पानी की टंकियों में पेयजल की सप्लाई हुई, उन टंकियों में अभी यह वायरस मौजूद हो सकता है। एनआईवी की टीम ने 29 जनवरी को शहर से पानी के सैंपल भरे थे। शहर के उन क्षेत्रों में जहां अश्वनी खड्ड परियोजना से पानी की आपूर्ति होती है, वहां वायरस की संभावला है। ऐसे में शहर में पीलिया की रोकथाम के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यहां पानी के सैंपल हुए फेल
1 -अश्वनी खड्ड परियोजना सोलन के इनलेट का पानी
2 -अश्वनी खड्ड सोलन ट्रीटमेंट के बाद आउटलेट का पानी