राजधानी में पीलिया रोग फैलने के बाद अश्वनी खड्ड का दूषित पानी सोलन शहर व आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा है। चिंताजनक यह है कि गिरि के साफ पानी को स्टोरेज टैंकों में अश्वनी खड्ड की इसी सप्लाई से मिक्स करके लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है। नतीजतन शिमला में पीलिया से एक की मौत और बढ़ते रोगियों के बाद सोलन में भी लोग जलजनित रोग की चपेट में आने लगे हैं। अस्पताल के पास पीलिया के ग्रस्त लोगों को पूरा आंकड़ा नहीं है। लेकिन, रोजाना विभिन्न क्षेत्रों से पीलिया से ग्रस्त सामान्य से अधिक रोगियों के आने की अधिकारी पुष्टि कर रहे हैं। उधर, राजधानी शिमला में तो नगर निगम ने अश्वनी खड्ड से पीने के पानी की सप्लाई पांच जनवरी के बाद बंद कर दी है। लेकिन, सोलन में इसकी सप्लाई बढ़ा दी गई है। रोजाना 8-10 लाख गैलन पानी लोगों के घरों में पहुंच रहा है।
स्टोरेज टैंक में मिक्सिंग
सोलन शहर में पानी की स्टोरेज बढ़ गई है। नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वार्ड आठ से नवनिर्वाचित पार्षद पवन गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में 27 लाख गैलन पानी नप के स्टोरेज टैंकों में जमा है। रोजाना 8 से 10 लाख गैलन अश्वनी का पानी टैंकों में पहुंच रहा है। जबकि औसतन टैंकों में बीस लाख गैलन तक पानी स्टोर रहता था।
गिरि के साफ पानी को स्टोरेज टैंकों में अश्वनी खड्ड के पानी से मिक्स करके लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है।
नहीं भरे जा रहे सैंपल
आलम यह है कि संबंधित विभागों ने पानी के सैंपल नहीं भरे हैं और प्रशासन ने उनसे इस बारे में पूछता तक मुनासिब नहीं समझा। विशेषज्ञों का कहना है कि पीलिया दूषित पानी को पीने से फैल रहा है। शहर के अस्पतालों में पीलिया के बढ़ते मामलों को देखकर लोगों में भय का माहौल है।
झाड़ फूंक को मान रहे अचूक इलाज
एक ओर जहां पीलिया ग्रसित मरीज अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग पीलिया से जल्दी छुटकारा पाने के लिए झाड़ फूंक का सहारा ले रहे हैं। सोलन शहर व आसपास के क्षेत्रों में झाड़ फूंक से पीलिया दूर करने वालों की कमी नहीं है। कई पढ़े-लिखे लोग भी झाड़ फूंक को पीलिया ठीक करने का बेहतर और अचूक इलाज मान रहे हैं, जो रोगी के लिए घातक भी हो सकता है।
रोगियों का हो रहा बेहतर उपचार : डॉ. उप्पल
सोलन अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि अस्पताल पहुंचे पीलिया रोगियों का इलाज किया जा रहा है। मरीजों को इस दौरान उबला पानी पीने एवं खाना खाने की सलाह दी जा रही है ताकि शरीर में कमजोरी न आए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले हर मरीज को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। लोग खुद भी अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें। जबकि, एमडी देवेश्वर पांडेय के मुताबिक ओपीडी में पीलिया के रोगियों की संख्या काफी बढ़ी है।
पीलिया के लक्षण
-रोगी को बुखार होना
-भूख न लगना
-जी मिचलाना और उल्टियां होना
-आंखों और नाखूनों में पीलापन होना
-पेशाब का पीला आना
-अत्यधिक थकावट होना
बचाव के उपाय
-उबला पानी पीना
-लक्षण का पता चलते ही डाक्टरी इलाज करवाएं
-भरपूर आराम करें
-समय-समय पर डॉक्टरी जांच करवाएं
-अच्छी तरह साबुन से हाथों को धोएं
इनका करें सेवन
पीलिया के दौरान चावल, दलिया, खिचड़ी, शकरकंद, पपीता, चीकू, छाछ, मूली का सेवन करना फायदेमंद साबित होता है। लेकिन, अधिक पके फल रोगी की तबीयत को अधिक बिगाड़ सकते हैं। लिहाजा फल अधिक पके न हों और सेवन से पहले अच्छी तरह से साफ करना न भूलें।