पेपर मिलों की मनमानी से राज्य के गत्ता उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। अधिकांश मिलों ने पेपर के रेट 15 से 18 फीसदी बढ़ा दिए हैं। इससे गत्ता उद्योग बुरी तरह हिल गया है। प्रदेश के गत्ता पेटी उत्पादकों ने अपने ग्राहकों को रेट दे रखें हैं, वह अब उत्पादन मूल्य से काफी कम रह गए हैं।
उद्योग चलाओ तो घाटा और न चलाओ तो भी घाटा। अब गत्ता पेटी निर्माता करें भी तो क्या करें? यह कहना है गत्ता उद्योग मालिकों का। वहीं एडवांस में की गई बुकिंग के चलते गत्ता उद्योग मालिकों को उसी रेट पर सप्लाई देनी होगी।
बीबीएन गत्ता उद्योग संघ की बैठक ज्ञान परिसर बागबानियां में संस्था के प्रधान हेमराज चौधरी की अध्यक्षता में हुई। इसमें दिनप्रतिदिन बढ़ते रेटों पर गहरी चिंता जाहिर की गई। महामंत्री अशोक राणा और सलाहकार नवीन वत्स ने बताया कि पेपर मिलें दिनोंदिन पेपर के रेट बढ़ा रही है।
पेपर मिलें 14 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रही हैं। इससे पूरे हिमाचल में पेपर की कमी हो जाएगी और बाद मेें ब्लैक में औने पौने दामों में पेपर बेचा जाएगा। वेंडर और गत्ता पेटी के खरीददार एकदम दाम बढ़ने को कतई तैयार नहीं हैं। संघ ने सरकार से हस्तक्षेप कर इस मामले में राहत दिलाने की मांग की है।
प्रदेश में हैं 350 गत्ता उद्योग
पुराने दामों पर ही हिमाचल के उद्योगों और फल उत्पादकों को गत्ता दिया जा रहा है। पेपर के बढ़ रहे दामों के चलते प्रदेश के 350 गत्ता उद्योगों की बर्बादी तय है। कोई भी उत्पादक ज्यादा घाटा सहने में असमर्थ हैं। खरीददार एकदम रेट नहीं बढ़ाते हैं। मंहगा पेपर खरीदकर बॉक्स बनाएंगे तो खाएंगे क्या?
तो हड़ताल करने को होंगे मजबूूर
हेमराज चौधरी और अशोक राणा ने कहा कि अगर पेपर मिलों ने जबरदस्ती करने की कोशिश की तो सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। समय रहते केंद्र सरकार ने पेपर मिलों पर नकेल नहीं डाली तो उद्योग बंद करके हड़ताल करने को मजबूर होंगे। बैठक में अध्यक्ष हेमराज चौधरी के अलावा अशोक राणा, तेजेंद्र गोयल, अजय राणा, अजय चौधरी, बलदेव गोयल, नवीन वत्स, राजीव कुमार, नीरज गोयल और आलोक सिंह सहित कई सदस्य मौजूद रहे।