बद्दी के बंसती बाग में स्वास्थ्य जांच शिविर में रोगियों की जांच करते हुए चिकित्सक- स्रोत- संस्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। नगर निगम के वार्ड-9 स्थित बसंती बाग कॉलोनी में आयोजित श्रीराम कथा में अयोध्या धाम के कथा व्यास डॉ. धरणीधर महाराज ने भगवान राम के विभिन्न प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान खोजने से नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और विनम्रता से प्राप्त होते हैं। श्रद्धा और आंसुओं से की गई पुकार भगवान को भक्त के द्वार तक ले आती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सरल होना सबसे कठिन है और जब मन, वचन और कर्म से चतुराई दूर होती है, तभी प्रभु का साक्षात्कार संभव होता है। कथा के दौरान उन्होंने केवट प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि केवट की विनम्रता और सेवा भाव के कारण ही उसे प्रभु चरण पखारने का सौभाग्य मिला। केवट ने भगवान राम से उतराई लेने से इनकार करते हुए माता जानकी को बेटी मानने का भाव प्रकट किया। डॉ. धरणीधर महाराज ने कहा कि भगवान राम ने लोक मर्यादा के पालन के लिए केवट से नाव मांगी, जबकि वे स्वयं भी नदी पार कर सकते थे। वहीं वन में भरत के आगमन पर लक्ष्मण ने संदेह जताया, लेकिन भगवान राम ने उन्हें शांत किया। दोनों भाइयों का मिलन अत्यंत भावुक रहा। भरत ने भगवान राम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने पिता के वचन की मर्यादा निभाते हुए इसे विनम्रता से अस्वीकार कर दिया और भरत को माताओं की सेवा व राज्य संचालन का दायित्व सौंपा। इसके बाद भरत ने प्रभु राम की खड़ाऊं सिंहासन पर स्थापित कर राजकाज संभाला। कथा के दौरान परमजीत पम्मी, संजय चौरसिया, मनीष भारद्वाज, रंजीत पांडेय, हंसानंद झा, संजय कौशिक, कमलदेव, सुनील राय, रंजीत श्रीवास्तव, प्रदीप द्विवेदी, कृष्ण कांत त्रिपाठी, डॉ. लाल बाबू यादव, संजय तायल और एसके पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।