नौणी विवि में शहद का उत्पादन गिरा।
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कृषि, बागवानी संबंधी किसानों बागवानों की परेशानियों को दूर करने वाला नौणी विवि खुद की परेशानी को दूर नहीं कर पा रहा। फूलों में कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से विवि में शहद उत्पादन 50 फीसदी तक गिर गया है। बताया जा रहा है कि हरियाणा के फार्म में किसानों के अधिक कीटनाशकों के प्रयोग से मधुमक्खियां बीमारी की चपेट में आकर मर गईं। इनकी हनी बीज की कालोनी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
वैज्ञानिक इस वर्ष फूलों के कम खिलने को भी इसका कारण मान रहे हैं। इससे शहद उत्पादन काफी गिर गया है। हर साल नौणी विवि के एंटोमोलाजी (कीट) विज्ञान विभाग द्वारा शहद का उत्पादन किया जाता है। हर वर्ष विभाग 900 किलो हर्बल (सिंगल और मल्टीफलोरल) शहद के उत्पादन का लक्ष्य पूरा करता है। शहद की कमी के कारण नौणी से शहद खरीदने वालों को उसकी उपलब्धता में भारी परेशानी हो रही है।
इतना होता है उत्पादन
नौणी विवि में हर वर्ष 9 क्विंटल शहद का उत्पादन किया जाता है। यह विवि द्वारा हर साल बेचा जाता है। शहद को खरीदने वाले दवाइयों, गिफ्ट और अपने उपयोग के लिए इसे लेते हैं। इसके साथ ही विवि के विभिन्न विभागों के द्वारा रिसर्च वर्क के लिए भी शहद कीट विज्ञान विभाग से ही लिया जाता है। इस साल विभाग केवल 4 क्विंटल शहद की ही उत्पादन कर सका है जो मांग से बहुत कम है।
कीटनाशक से मरीं मधुमक्खियां : डॉ. अंजू
विवि के कीट विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू सुधाकर ने बताया कि विभाग द्वारा हर वर्ष मधु मक्खियों को हरियाणा ले जाया जाता है। यहां मौसम मधुमक्खियों के लिए अच्छा होता है। साथ ही फूलों की भी कोई कमी नहीं होती। लेकिन इस बार किसानों के द्वारा फसलों में कीटनाशक का स्प्रे किया गया। इससे मधुमक्खियां की कालोनियां खत्म हो गईं। यही कारण है कि विभाग इस बार कम शहद का उत्पादन कर पाया है।