हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर कार्ड के नवीनीकरण और नए कार्ड बनाने की प्रक्रिया में सर्वर में आई तकनीकी खराबी के कारण भारी देरी हो रही है। 1 जून से शुरू हुई इस प्रक्रिया के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी लगभग 2000 आवेदन लंबित पड़े हैं, जिससे लोगों को निशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ उठाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
सर्वर की समस्या ने रोकी प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्डों की मंजूरी का कार्य एक थर्ड पार्टी एजेंसी (टीपीए) को सौंपा गया है। इसी टीपीए के सर्वर में आई तकनीकी समस्या के कारण कार्डों के अनुमोदन में अप्रत्याशित देरी हो रही है। यह पहली बार है जब हिमकेयर कार्डों की मंजूरी में इतनी देरी देखी जा रही है। नतीजतन, नए कार्ड बनवाने और पुराने कार्डों का नवीनीकरण कराने के इच्छुक आवेदकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
मरीजों को हो रही परेशानी
इस देरी के कारण मरीजों को तत्काल उपचार के लिए हिमकेयर कार्ड का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से, ऑपरेशन के लिए नए कार्ड बनवाने वाले मरीजों को भी इंतजार करना पड़ रहा है। आवेदकों की प्रतीक्षा सूची लगातार लंबी होती जा रही है, क्योंकि कई लोग अभी भी कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं।
30 जून तक खुला है पोर्टल, बीमा मॉडल पर संचालन प्रस्तावित
विभाग ने नए हिमकेयर कार्ड बनाने और पुराने कार्डों के नवीनीकरण के लिए पोर्टल को 30 जून तक खुला रखा है। प्रदेश में हिमकेयर योजना में दो महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं, जिसके तहत योजना को अब बीमा मॉडल पर संचालित किया जाएगा।
तकनीकी समस्या का समाधान और आपातकालीन व्यवस्था
हिमकेयर ऑपरेशंस के स्टेट हेड, जैरूल खान ने बताया कि प्रत्येक कार्ड का क्रमवार सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि सर्वर में कुछ तकनीकी समस्याएं थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मरीज को आपातकालीन स्थिति में कार्ड की मंजूरी की आवश्यकता है, तो अस्पतालों के माध्यम से उसका अनुमोदन किया जा रहा है।