उधर, लघु उद्योग भारती के प्रदेश महासचिव संजीव शर्मा ने बताया कि व्यावसायिक एलपीजी नहीं मिल रही है। कैंटीन चलाना कठिन हो गया है। जो कामगार कमरे में रहते हैं, उन्हें भी गैस नहीं मिल रही। भाड़े में 700 रुपये क्विंटल तक बढ़ोतरी हुई है। दुर्गापुर से पहले 3500 रुपये क्विंटल स्क्रैप आता था, अब 4200 रुपये में आ रहा है। गत्ता उद्योग संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने बताया कि 19 किलो का एलपीजी गैस सिलेंडर पहले 1600 रुपये में मिलता था, अब 2000 रुपये में मिल रहा है। पेपर के दाम में उछाल आने से गत्ता संचालकों को डिब्बे के दाम भी बढ़ाने पड़ेंगे। इसके अलावा इंजन आयल, गियर ऑयल, ग्रीस, हाइड्रोलिक ऑयल के दाम 10 से 15 फीसदी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में उद्योग चलाना अभी घाटे का सौदा बन गया है।