क्षेत्रीय अस्पताल में दो दिन से नहीं हो रही सैंपलों की जांचअधिक गर्मी होने से बलगम सैंपल खराब होने की आशंका
सीबी नार्ट मशीन में रोजाना 12 सैंपलों का होता है परीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग तेजी से कार्य करने का दावा कर रहा हो, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ओर ही है। इन दिनों सोलन जिले के क्षेत्रीय अस्पताल में क्षय रोग की जांच करने वाले सीनियर तकनीशियन को प्रशिक्षण के लिए धर्मपुर भेज दिया गया है। उसकी जगह किसी को भी तैनात नहीं किया है। इसके चलते सैंपलों की जांच रुक गई है। बीते दो दिनों से सैंपलों की जांच अस्पताल में नहीं हो रही है। इससे टीबी मुक्त अभियान पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अस्पताल में रोजाना चार से पांच संदेहास्पद मरीजों के सैंपलों की जांच होती है, लेकिन मरीज सैंपलों को लेकर तो आ रहे हैं लेकिन इनकी जांच नहीं हो रही है। लोगों को बिना रिपोर्ट ही लौटना पड़ रहा है। कर्मचारी उन्हें सोमवार को आने के लिए कह रहे हैं। वहीं इन दिनों अधिक गर्मी भी पड़ रही है। ऐसे में सैंपलों के खराब होने की आशंका है, क्योंकि बैक्टीरिया अधिक गर्मी में नहीं टिक पाता है।
गौर रहे कि क्षेत्रीय अस्पताल जिले का बड़ा अस्पताल है। यहां पर बलगम जांच के लिए अलग से केंद्र स्थापित किया गया है। जहां पर संदिग्ध क्षय रोगियों के सैंपलों को जांच की जाती है। अस्पताल में रोजाना करीब चार से पांच मरीज बलगम के सैंपलों की जांच करवाने के लिए आते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लैब में सीबी नार्ट मशीन लगाई गई है। एक दिन में 12 सैंपलों की जांच के बाद रिपोर्ट दी जाती है। एसटीएलएस को प्रशिक्षण के लिए भेजने के बाद सैंपलों की जांच रुक गई है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। वहीं रिपोर्ट न मिलने से मरीजों का उपचार भी देरी से शुरू होगा।
इनसेट
एक तकनीशियन क्षय रोग के प्रशिक्षण के लिए गया है। इसकी जगह दूसरा तकनीशियन तैनात किया गया है। लैब कर्मचारियों से जवाब मांगा जाएगा कि ऐसा क्यों हो रहा है। क्षय रोग मुक्त अभियान के लिए कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। -डॉ. राजन उप्पल, कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल, सोलन