अस्पताल प्रशासन की ओर से भेजी मांगों के बाद भी नहीं लगीं मशीनें
मरीजों को निजी क्लीनिक में जाकर करवाने पड़ रहे एक्सरे
सरकारी में निशुल्क होता है एक्सरे, बाहर देने पड़ रहे 300 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में अब भी मरीजों को सरकारी अस्पतालों में मशीनों की कमी के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिले के छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सालों बाद भी एक्सरे तक की सुविधा नहीं मिल रही है। इस कारण मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल प्रशासन और लोगों की ओर से भी मशीनों को लेकर विभाग को भी मांग भेजी है, लेकिन इसके बाद भी सुविधा नहीं मिल रही है।
डॉक्टरों की ओर से एक्सरे लिखे जाने पर मरीजों को मजबूरन निजी क्लीनिकों में जाना पड़ रहा है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दाड़लाघाट, पट्टा महलोग, लाहोरघाट, दिग्गल और बरोटीवाला में एक्सरे मशीनें ही नहीं हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंडी में मशीन होने के बाद अब तक रेडियोग्राफर ही नहीं है। ऐसे में मशीन केवल अस्पताल में पड़े-पड़े धूल फांक रही है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निशुल्क एक्सरे की सुविधा दी जाती है। वहीं निजी क्लीनिकों में मरीजों को 300 से 400 रुपये देकर एक्सरे करवाने पड़ रहे हैं। वहीं आपातस्थिति में भी मरीज निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं।
सात अस्पतालों में नहीं अल्ट्रासाउंड मशीन
जिले के सात अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें नहीं लगाई गई हैं। इसके अलावा चार अस्पतालों में मशीनों लगने के बाद भी रेडियोलॉजिस्ट के न होने के कारण धूल फांकने का ही काम कर रही हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में टेस्ट न होने के कारण निजी क्लीनिकों में मरीजों को 500 से 600 रुपये तक खर्च कर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं।
कोट
विभाग की ओर से मशीनों की मांग आने के बाद उसे सरकार को भेजा जा रहा है। मशीनों को मंजूरी मिलने के बाद अस्पतालों में मशीनें लगा दी जाएंगी। मरीजों को सुविधाएं देने के लिए विभाग की ओर से मशीनों को लगाने के साथ रेडियोलॉजिस्ट की मांग भी भेजी जा रही है।
- डाॅ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग सोलन