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Solan News: बिजली गुल होने से न एक्सरे और न ही मिल पाई अल्ट्रासाउंड की सुविधा

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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में जनरेटर से नहीं चल पाई मशीनें, मरीजों को झेलनी पड़ी परेशानी
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मोबाइल की रोशनी से की गई आपातकालीन वार्ड में मरीजों की पट्टी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। मां शूलिनी मेले को लेकर किए जा रहे मरम्मत कार्य के चलते शहर में बुधवार को बिजली बंद रही। इसका असर क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में भी देखने को मिला। बिजली गुल होने के कारण दिनभर अस्पताल में जनरेटर चलते रहे, लेकिन मरीजों को न ही एक्सरे की सुविधा मिल पाई और न ही अल्ट्रासाउंड की। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों और लैब का रुख करना पड़ा। आपातकालीन वार्ड में लोगों की पट्टी भी मोबाइल की रोशनी से करनी पड़ी।
बड़ी मशीनें होने के कारण यह काफी अधिक बिजली का उपयोग करती हैं। जनरेटर की बिजली इन मशीनों को काफी नहीं हो पाती है। ऐसे में मरीजों को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े। वहीं क्रस्ना लैब में भी अंधेरा पसरा रहा। मरीजों को ब्लड टेस्ट के लिए या तो निजी लैब में जाना पड़ा, या फिर इंतजार करना पड़ा। वहीं आपातकालीन वार्ड में चोटिल होकर आए मरीजों की ड्रेसिंग रूम में बिना बिजली के मोबाइल की बत्ती से ही पट्टी करनी पड़ी। ऐसे में पट्टी करने में डॉक्टर और अन्य स्टाफ को भी परेशानी पेश आई।
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इनसेट
रोजाना होते हैं 30 अल्ट्रासाउंड और 60 एक्सरे
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में रोजाना 30 मरीजों के अल्ट्रासाउंड और लगभग 60 के एक्सरे किए जाते हैं। बिजली न होने के कारण सभी मरीजों को टेस्ट के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में एक्सरे के लिए 100 से 500 रुपये तक लिए जाते हैं। वहीं अल्ट्रासाउंड के 300 से 1000 रुपये तक देने पड़े। वहीं क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एक्सरे निशुल्क होता है और अल्ट्रासाउंड के लिए मात्र 130 रुपये देने पड़ते हैं।
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कोट
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की मशीनें बड़ी हैं। बिजली बंद होने के बाद जनरेटर के सहारे टेस्ट करना मुश्किल है। यदि मशीन से टेस्ट करने की कोशिश की गई, तो मशीन के खराब होने का भी डर बना रहता है। ऐसे में जनरेटर के सहारे मशीनों से टेस्ट नहीं हो पाए हैं। बिजली आने के बाद मरीजों के लिए सभी सुविधाएं दोबारा से शुरू हो जाएंगी।
- डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
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