देश में हर वर्ष करीब दो से ढाई करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। गर्भावस्था पंजीकरण के साथ ही लाभार्थियों की निगरानी यू-विन जैसे डिजिटल प्लेटफार्म से की जाती है। सरकार सुनिश्चित कर रही है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को पांच प्रसवपूर्व जांच उपलब्ध हों, जिनमें से कम से कम एक जांच विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा की जाए, ताकि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो सके। इसका परिणाम है कि देश में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 79 से बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुंच गया है।