हिमाचल प्रदेश के सिगरेट कारोबार में करोड़ों का टैक्स फ्राड सामने आया है। सोलन जिला के एक बड़े उद्यमी ने शातिराना टैक्स चोरी का दाव खेला। बाहरी राज्य से सिगरेट का भारी स्टाक मंगवाकर हिमाचल में बेच दिया। लेकिन बिक्री बाहरी राज्यों में दर्शा दी। इस गेम में उद्यमी ने करीब 34 फीसदी टैक्स चोरी करते हुए करोड़ों का मुनाफा अपनी जेब में डाल लिया।
हिमाचल के बजाय बाहरी राज्यों में बिक्री और खरीद पर महज दो फीसदी टैक्स लगता है और हिमाचल में बिक्री पर 36 फीसदी टैक्स लगाया जाता है। आबकारी एवं कराधान विभाग के दक्षिणी क्षेत्र के उड़नदस्ते ने दिल्ली, सहारनपुर और हिमाचल के विभिन्न डीलरों के यहां जांच करते हुए यह करोड़ों का गड़बड़झाला पकड़ा है।
कारोबारी को कर और जुर्माने सहित 2.70 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करवाने के आदेश दिए हैं। इसमें से लगभग 1.16 करोड़ वसूल किए जा चुके हैं। शेष के लिए एक महीने का समय दिया है। इस फर्जीबाड़े के तार प्रदेश के विभिन्न जिलों समेत पंजाब, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के कारोबारियों से जुड़े हैं।
कारनामा: 34 फीसदी जेब में दो फीसदी प्रदेश सरकार के हिस्से
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त उड़नदस्ता दक्षिणी क्षेत्र परवाणू डॉ. सुनील कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हिमाचल में सिगरेट की बिक्री पर 36 प्रतिशत दर से मूल्य वर्धित कर (सेल टैक्स या वैट) लगता है। यदि इसी सामान को बाहरी राज्यों में बेचा जाए तो दो फीसदी टैक्स लगता है।
इस फर्म ने बाहर से सोलन में 2 फीसदी टैक्स अदा करके सोलन में माल मंगवा लिया। अगर उसे हिमाचल में बेचना है तो उस पर 36 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा। इस टैक्स को बचाने के चक्कर में उसने हिमाचल में अवैध रूप से सारा स्टाक बेच दिया और बिक्री बाहरी राज्यों के कारोबारियों की दिखा दी। राज्य सरकार को मात्र 2 प्रतिशत टैक्स ही अदा किया। 34 फीसदी अपनी जेब में डाल लिया। विभागीय उड़न दस्ते में कार्यरत इंस्पेक्टर रूपिंद्र सिंह ने इस फर्जीवाड़े को ट्रेस किया।
कुछ इस तरह के मामले आए सामने
केस 01- इस फर्म द्वारा एक करोड़ साठ लाख रुपये की सिगरेट की बिक्री दिल्ली स्थित एक व्यापारी को दिखाई गई। आबकारी एवं कराधान विभाग की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की। लेकिन विभाग ने इस टैक्स फर्जीबाड़े को ट्रेस कर लिया।
व्यापारी की छानबीन दिल्ली सरकार के वाणिज्य कर विभाग ने परवाणू उड़नदस्ता के अधिकारियों की मौजूदगी में की। पाया कि वह फर्म अस्तित्व में है ही नहीं है। जांच में खलासा हुआ है कि जिस स्थान पर उक्त व्यापारी की बड़ी दुकान होनी चाहिए थी वह पता एक छोटे से रिहायशी कमरे का था। इसमें एक मजदूर रह रहा था।
केस 02- सोलन जिले की फर्म ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की सिगरेट की बिक्री चंडीगढ़ के एक व्यापारी को दिखा दी जो कई साल पहले काम बंद कर चुका था। टीम जब बेचे सामान के पते पर पहुंची तो वहां कुछ नहीं था। जब पड़ताल की गई तो पता चला कि दुकान काफी समय पहले बंद हो चुकी है। इस प्रकार व्यापारी ने हिमाचल सरकार को 36 प्रतिशत की जगह केवल 2 प्रतिशत टैक्स दिया और 34 प्रतिशत टैक्स की रकम की हेराफेरी कर डाली।
इस तरह पनपा संदेह
फर्म ने वर्ष 2013-14 और 2014-15 में यह घपला किया। खुलासा तब हुआ जब विभाग ने फर्म की खरीद और बिक्री पर ध्यान दिया। फर्म सहारनपुर (उतर प्रदेश) में बनने वाली मशहूर ब्रांड की सिगरेट का व्यापार करती है। सहारनपुर में बनने वाली सिगरेट यदि सोलन लाई जाए और फिर उसे पंजाब हरियाणा या दिल्ली में बेचा जाए तो व्यापारी को दो बार टैक्स लगेगा और माल भाड़ा भी दो बार देना होगा।
हरियाणा या दिल्ली का व्यापारी सोलन के बजाय सहारनपुर से सिगरेट खरीदना पसंद करेगा ताकि दोहरे टैक्स और माल भाड़े से बच सके। अत: सोलन की इस फर्म पर संदेह होना लाजमी था। जांच में पाया गया कि एक ही गाड़ी से करोड़ों का माल बाहरी राज्यों में पहुंचाया दिखाया गया है।
पड़ताल में पता लगा कि गाड़ी दिल्ली कभी जाती ही नहीं क्योंकि उसका वहां का न तो परमिट है और न ही टैक्स। खुलासा होने के बाद उड़नदस्ते ने बाहरी राज्यों के वाणिज्य कर विभागों से संपर्क साधा और पाया कि चारों व्यापारी जिन्हें सोलन जिले की उक्त फर्म सिगरेट की बिक्री दिखा रही थी फर्जी थे।