बीबीएन में कागजों में फर्जी उद्योग दिखाकर शातिरों ने सरकार को लाखों का चूना लगा डाला है। उक्त उद्योग ने कागजों में फर्जी ट्रकों के नंबर डाल करोड़ों का सामान राज्य के अंदर और बाहर भेजकर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकते रहे। सर्वे के दौरान सेंट्रल एक्साइज ने इस उद्योग में करोड़ों के घपले की आशंका को देखते हुए बद्दी में वीरवार को छापेमारी की। इस दौरान चार सदस्यीय टीम ने खूब पसीना बहाया, लेकिन उद्योग नहीं मिला।
कागजों में जिस जगह में यह उद्योग दर्शाया गया वहां कुछ नहीं था। किसी ऑटो स्पेयर पार्ट कंपनी के नाम पर यह फर्जीवाड़ा बताया जा रहा है। कागजों में बरोटीवाला के पास लगते गांव बगुवाला में इसकी लोकेशन बताई गई है। टीम ने बरोटीवाला में इस उद्योग के बारे में जानने के लिए कई जगह दबिश दी, लेकिन खाली हाथ लौटे। सूचना है कि संबंधित विभागों से भी इस संदर्भ में जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कथित ऑटो उद्योग को वह ट्रेस नहीं कर पाए। लिहाजा बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस की मदद ली जा सकती है।
ट्रक यूनियन बीबीएन के उपप्रधान भाग सिंह ने बताया कि वीरवार सुबह चार लोगों की टीम उनकी यूनियन में पूछताछ करने पहुंची। जिस कंपनी और ट्रकों के नंबर का जिक्र कर रहे थे, जांच के बाद वह फर्जी पाए गए। जिन ट्रकों के नाम पर करोड़ों का माल इधर-उधर भेजा गया वह सब फर्जी निकले हैं।
प्रदेश में औद्येागिक पैकेज की रियायतों का लाभ उठाने के के मकसद से कुछ बाहरी राज्यों के लोगों ने यहां उद्योग खोल लिए हैं। यह उद्योग महज नाम के हैं जबकि उद्योग का सारा काम प्रदेश/बीबीएन से बाहर होता है। पैकेज के लाभ उठाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए गए, लेकिन इस नाम के उद्योग का ही न होना हैरानी में डालने वाला है।
बद्दी में इससे पहले इनपुट टैक्स क्रेडिट के करोड़ों के घपले भी सामने आ चुके हैं। इसमें फर्जी फर्में बनाकर सामान की खरीद फरोख्त कर सरकार से लाभ लिए गए हैं। इसमें दिल्ली की एक कंपनी में करोड़ों का फर्जीवाड़ा निकला था। वहीं परवाणू में भी दक्षिण क्षेत्र के उड़नदस्ते ने इस तरह के मामलों को पकड़कर कामयाबी हासिल की है।