बद्दी के गुल्लरवाला के ऐतिहासिक दुर्गा माता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन
- फोटो : भिनगा कस्बे में बुधवार की रात बारिश के दौरान गुजरते वाहन।
ऋषि गौतम ने भीष्म पितामह व राजा परीक्षित के प्रसंग सुनाए, भंडारे में भक्तों ने लिया प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। बद्दी-साई मार्ग पर स्थित गुल्लरवाला के ऐतिहासिक दुर्गा माता मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान क्षेत्र के कथावाचक ऋषि गौतम ने महाभारत और श्रीमद्भागवत से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भीष्म पितामह की इच्छामृत्यु का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर 58 दिनों तक जीवित रहे और अंततः परमधाम को प्राप्त हुए। इस प्रसंग से धर्म और त्याग का संदेश दिया गया।उन्होंने राजा परीक्षित की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया। ऋषि गौतम ने बताया कि ऋषि शृंगी के श्राप के कारण राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग द्वारा मृत्यु का आभास हुआ। इसके बाद उन्होंने राजपाट अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर संसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया और गंगा तट पर भगवान के ध्यान में लीन हो गए। वहीं शुकदेव जी महाराज ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कराया। कथावाचक ने यह भी बताया कि महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने सूक्ष्म रूप धारण कर गर्भ में प्रवेश कर निष्फल कर दिया और बालक की रक्षा की। इसी कारण बालक का नाम परीक्षित रखा गया कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पंचायत प्रतिनिधि, समाजसेवी एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कथा के उपरांत प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है। वीरवार को समाजसेवी गुरमेल चौधरी ने भंडारे की सेवा प्रदान की।