कम बारिश होने से इस बार अधिक फैला सूंडी का प्रकोप
बीबीएन में चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है मक्की की फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बीबीएन के पहाड़ी क्षेत्र में मक्की की फसल पर फाल आर्मी वर्म (सूंडी) रोग ने हमला बोल दिया है। यह एक प्रकार की कीड़ा होता है तो मक्की के तने का रस चूसकर उसे सूखा देता है। यह रोग पिछले तीन साल से किसानों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। पहाड़ी क्षेत्र में मक्की की अगेती बिजाई हुई है। यहां पर यह रोग अधिक फैला है। वहीं मैदानी क्षेत्र में अभी फैलना शुरू हुआ है।
बीबीएन में चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र जमीन पर मक्की की फसल होती है। पहाड़ी क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा न होने से किसान पहली ही बारिश में मक्की की बिजाई कर देते हैं। वर्तमान में अधिकतर किसानों के खेत में सूंडी रोग ने हमला बोल दिया है। सूंडी मक्की के तनों में हमला करती है जिससे पौधे का विकास रुक जाता है। अगर बारिश होती है तो पानी भरने से यह सूंडी मर जाती है, लेकिन इस साल कम बारिश होने से सूंडी का प्रकोप ज्यादा है।
रामशहर पंचायत की प्रधान कृष्णा शर्मा, साई के प्रधान मेहर चंद, कंडोल के प्रधान अनिल शर्मा, सरौर के प्रधान धर्मपाल चंदेल, रतवाड़ी की पूजा देवी, बेहड़ी के प्रधान कृष्ण चंद, क्यार कनेता के रघुराज पराशर, बायला की प्रधान रचना कौशल ने बताया कि इस साल बारिश बहुत कम हो रही है। इससे सूंडी ने मक्की की फसल को तबाह करके रख दिया है। इस रोग ने पिछले तीन साल से फसल को बर्बाद कर रहा है।
प्रगतिशील किसान राहुल देव चौहान ने बताया कि किसान अपने खेत में बांस की लकड़ी की टी बनाकर खड़ा कर सकते हैं। इस पर बैठकर पक्षी सूंडी व उसके अंडे को नष्ट करते हैं। उन्होंने यह प्रयोग के तौर पर अपने खेत में किया है जो काफी सफल रहा है। सूंडी के लिए कोराजीन आदि दवाई का छिड़काव किया जा सकता है, लेकिन इससे मित्र कीट भी मर जाते हैं, जो फसल के लिए नुकसानदायक हैं।
वहीं कृषि विकास अधिकारी भोपाल ठाकुर ने बताया कि किसान 60 एमएल कोराजीन 200 लीटर पानी में मिलाकर इसे पांच बीघा जमीन में छिड़काव करें। यह छिड़काव रात के समय करें। इससे सूंडी को रोकने में काफी मदद मिलेगी। बारिश होती है तो पानी मक्की के गोब में जमा हो जाता है। पानी में यह कीट व उसके अंडे मर जाते हैं।
बद्दी में मक्की की फसल में सूंडी का प्रकोप। संवाद