शहर में डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन योजना शुरू होने से पहले एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार योजना को चलाने वाले नगर परिषद सोलन के लगभग 68 सफाई कर्मचारी अपनी ड्यूटी के साथ डोर टू डोर का अतिरिक्त कार्य अपने कंधों पर लेने से मुकर गए हैं।
सोमवार को सभी कर्मचारियों ने विरोध दर्ज कराते हुए शहर में सफाई का कार्य रोक दिया। यूनियन ने बीच में आकर मामले को शांत किया गया। इसके बाद ही वह अपने कार्यों पर लौटे।
कर्मचारियों ने कहा कि पहले से ही ड्यूटी का समय ऐसा है कि आधा दिन क्षेत्र की मुख्य सड़कें और पार्क, गलियों को साफ करने में लग जाता है। ऐसे में घर-घर जाकर गारबेज कलेक्शन का कार्य करने के लिए समय नहीं मिलेगा।
सफाई कर्मचारी नप से अतिरिक्त लोगों को अपने साथ सफाई के कार्य में दिए जाने की मांग कर रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि सफाई के लिए जो वार्ड नप ने अपने पास रखे हैं उनमें शहर के सभी बड़े वार्डों के साथ मुख्य बाजार आते हैं। अब मंगलवार को यह कर्मचारी यूनियन के साथ मिलकर नप के ईओ से मुलाकातकर अपनी बात रखेंगे। इसके बाद अगर फैसला कर्मचारियों के पक्ष में नहीं हुआ तो शहर की सफाई व्यवस्था बाधित हो सकती है।
यह वार्ड हैं नप के पास
शहर के वार्ड नंबर 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और 15 के घरों, सरकारी और निजी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, रेस्तरां, करियाना तथा वेजिटेबल शॉप आदि से कूड़ा नगर परिषद एकत्र करवाएगा। इसके लिए हर वार्ड
में नप ने 6 कर्मचारियों को तैनात किया है। यह सभी वार्ड शहर के अधिक आबादी वाले और व्यावसायिक गतिविधियों की दृष्टि से व्यस्त वार्ड हैं। वार्ड 1, 2, 3, 4, 13 और 14 से कूड़ा उठाने का जिम्मा निजी ठेकेदारों को सौंपा जाएगा।
अनिश्चितकाल हड़ताल के आसार
नगर परिषद कर्मचारी यूनियन के प्रधान योगेश मेहता ने बताया कि शहर की जनसंख्या जिस अनुपात से बढ़ रही है, उसे देखते हुए नप के 68 सफाई कर्मचारी सोलन के विभिन्न वार्डों को साफ करने के लिए नाकाफी हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों से डोर-टू-डोर योजना के तहत अतिरिक्त कार्य करवाना भी सही नहीं। सोमवार को इसका विरोध जताते हुए सफाई का काम बंद रखा गया। लेकिन बाद में समझा बुझाकर मामला शांत करवा दिया। है।मंगलवार को ईओ से मुलाकात कर सारी बात उन्हें बताई जाएंगी। इसके बाद ही आगे की रणनीति बनेगी। अगर मांगें न मानी तो कर्मचारी अनिश्चित हड़ताल पर भी जा सकते हैं। नप के सेनेटरी अधिकारी केसी वर्मा ने बताया कि सोमवार को सफाई कर्मचारियों ने कुछ देर के लिए कार्य रोका था लेकिन समझाने के बाद काम पर लौट आए।
यह थी नप की योजना
नगर परिषद द्वारा घर-घर से कूड़ा इकट्ठा करने की योजना का क्रियान्वयन स्वयं सहायता समूहों (महिलाओं) को दिया था। यह फैसला राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत गठित महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए लिया गया। लेकिन यह मुहिम पैसों के फेर के चलते फेल हो गई। नप प्रबंधन की ढील के चलते कई गृह मालिकों ने डोर टू डोर के लिए शुल्क देने से जहां मना कर दिया वहीं जिन महिला समूहों के कंधों पर इस अभियान की नींव रखी थी उन्होंने इस योजना को आउटसोर्स कर ऐसे हाथों में काम सौंपा जो कर्मियों का पैसा लेकर गायब हो गए। इसके बाद 26 और 27 दिसंबर को नप ने बैठक में दोबारा डोर टू डोर योजना शुरू करने का खाका तैयार किया। बैठकों में पार्षदों की गैर मौजूदगी को लेकर भी कई सवाल उठे।
डीसी सोलन ने भी ली थी बैठक
डीसी सोलन ने भी सफाई व्यवस्था और डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन को सफल बनाने के लिए निर्देश दिए थे। इसमें 15 जून तक शहर को डस्टबिन फ्री बनाने और एक अगस्त तक हर घर से कूड़ा उठाने की मुहिम सुनिश्चित बनाने का निर्णय लिया था। हर वार्ड में एक लोकेशन पर कूड़ा एकत्र करके और समय-समय पर गाड़ी के माध्यम से उसे उठाने की बात कही। गाड़ियों कमी पर विभागों की पुरानी गाड़ियों इस कार्य में लगाने की बात हुई। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मुहिम बंद पड़ गई है।