चार करोड़ के 12 डिफाल्टरों ने भी किया एकमुश्त भुगतान की पॉलिसी के लिए किया आवेदन
31 मार्च से पहले निपटाए जाएंगे सभी मामले, तभी हटेगी कैपिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कैपिंग की मार से जूझ रहे बघाट बैंक के लिए एकमुश्त भुगतान की पॉलिसी (ओटीएस) से राहत मिलती नजर आ रही है। इसमें बैंक के आठ साल पुराने शिमला के एक डिफाल्टर ने अपने लोन के 15 लाख रुपये एक साथ जमा किए हैं। साथ ही डिफाल्टर ने एकमुश्त भुगतान के लिए भी आवेदन किया है, जो 31 मार्च से पहले अपना पूरा लोन चुका देगा। डिफाल्टर पर करीब 1 करोड़ रुपये का लोन है, जिसमें उसने 15 फीसदी राशि जमा करवा दी है। वहीं दूसरी ओर बैंक में एकमुश्त भुगतान के लिए भी अब डिफाल्टर आगे आ रहे हैं। अभी तक 12 डिफाल्टरों ने एकमुश्त भुगतान के लिए आवेदन कर दिया है। इसमें करीब 4 करोड़ रुपये की राशि इन डिफाल्टरों से वसूली जाएगी। इसमें सभी 50 लाख रुपये के आसपास के डिफाल्टर हैं। हालांकि 2 से 10 लाख रुपये तक के भी कई डिफाल्टर एकमुश्त भुगतान पॉलिसी के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसमें अब बैंक की ओटीएस कमेटी तय करेगी कि किस डिफाल्टर को कितनी छूट देनी है। इसके बाद यह डिफाल्टर एकमुश्त भुगतान कर देंगे। बैंक ने 31 मार्च तक इन सभी मामलों को निपटाने का निर्णय लिया है।
ओटीएस में मिलेगी 45 फीसदी तक की छूट
बघाट बैंक ने लोन की रिकवरी के लिए 15 से 45 फीसदी छूट देने का निर्णय लिया है। इसमें लोन के हिसाब से डिफाल्टरों को छूट देने का निर्णय लिया है। इसी कारण अब बड़े डिफाल्टर ओटीएस के लिए आवेदन कर रहे हैं। हालांकि अदालत के दौरान कई डिफाल्टरों ने आरोप लगाए थे कि उन पर बैंक प्रबंधकों की ओर से ब्याज काफी अधिक जोड़ा गया है। ऐसे में अब उन डिफाल्टरों को ओटीएस में राहत मिलेगी। उन्हें ब्याज में छूट मिल सकती है और वह ऋण को चुका सकते हैं।
111 करोड़ रुपये हुआ एनपीए
बघाट बैंक में 8 अक्तूबर को कैपिंग लगी थी। उस समय बैंक का 138 एनपीए था। हालांकि अभी एनपीए 111 करोड़ रुपये पहुंच गया है। बैंक को 31 मार्च से पहले उसे 100 करोड़ रुपये से नीचे जाना है। इसके लिए अब बैंक प्रबंधक लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसमें यदि यह 4 करोड़ रुपये का ऋण 31 मार्च से पहले आ जाता है तो बैंक का एनपीए 100 करोड़ से नीचे आने की उम्मीद है। 31 मार्च को आरबीआई की टीम दोबारा से कैपिंग को लेकर बैंक में निरीक्षण करेगी।
कोट
बैंक के एक करीब आठ साल पुराने डिफाल्टर ने वीरवार को 15 लाख रुपये जमा करवाए हैं। वहीं 31 मार्च से पहले वह अपना 1 करोड़ का लोन चुकता करने के लिए तैयार है। इसी तरह अभी तक 12 डिफाल्टरों ने एकमुश्त भुगतान के लिए आवेदन किया है। इनसे करीब 4 करोड़ रुपये का ऋण वसूला जाना है। यदि यह ऋण चुकता हो जाता है तो बैंक के एनपीए की राशि काफी कम हो जाएगी और बैंक को राहत मिलेगी। आरबीआई की टीम इसमें लगी कैपिंग हटा सकती है।
राज कुमार कश्यप, प्रबंध निदेशक बघाट बैंक, सोलन