नई शिक्षा नीति के तहत ग्रामीण स्तर पर शिक्षा में सुधार के प्रस्ताव का खाका खींचने की केंद्र सरकार की कवायद सोलन जिला में सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
स्कूल प्रबंधन और मुख्य शिक्षकों की लापरवाही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोक रही है। 31 अक्तूबर 2015 तक जिला में विशेष ग्राम सभाओं में शिक्षा नीति को ब्लॉक स्तर पर सुधारने के सुझावों के लिए पारित प्रस्ताव अभी तक केंद्र को नहीं पहुंचे हैं।
इससे संबंधित क्षेत्र के मुताबिक शिक्षा नीति का निर्धारण किया जाना है। यह डाटा केंद्र की वेबसाइट में अपलोड होना था। लेकिन तमाम रिमाइंडर और आदेशों के बावजूद 211 में से 164 स्कूल इस डाटा को अपलोड करने में विफल रहे। महज 47 ने ही डाटा भरा है।
लिहाजा नई शिक्षा नीति के तहत अधिकृत नोडल आफिसर और उच्च शिक्षा उपनिदेशक ने डिफाल्टर स्कूल प्रबंधनों को दो दिन के भीतर डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। अन्यथा 164 स्कूल प्रबंधनों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी इंक्रीमेंट रोकी जा सकती है। एचआरडी मिनिस्ट्री से इस बाबत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
दो बार भेजे रिमाइंडर : शर्मा
नोड्ल अधिकारी एवं उच्च शिक्षा उपनिदेशक जीवन शर्मा ने कहा कि डाटा अपलोड करने के लिए स्कूल प्रबंधनों को दो बार रिमाइंड भेजे जा चुके हैं। लेकिन महज 47 स्कूलों के डाटा ही अपलोड हुए हैं। निदेशालय से डिफाल्टर स्कूल प्रबंधनों पर कार्रवाई करने के आदेश हैं। यदि दो दिन शनिवार तक डाटा अपलोड नहीं किया तो सोमवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जिम्मेवार संबंधित स्कूलों के मुखिया होंगे।
इस वेबसाइट पर करें अपलोड
स्कूल प्रबंधन डाटा सर्वे.माईगव.इन पर अपलोड कर सकते हैं। दिक्कत आने पर विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। नोडल अधिकारी के मुताबिक डाटा अपलोड में दिक्कत आने पर विभाग 9805675240 और 9816176085 पर संपर्क कर सकते हैं।
यह डाटा होना है अपलोड
पंचायत चुनाव से पहलेे ग्रामसभा की बैठक में नई शिक्षा नीति को लेकर चर्चा की गई। अभिभावकों, पंचायत प्रधानों, वार्ड सदस्यों और आम लोगों के संबंधित क्षेत्र के शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संबंधी प्रस्ताव पारित किए। इन प्रस्तावों को विभाग की वेबसाइट पर लोड करना था। इनका मूल्यांकन करके संबंधित क्षेत्रों के लिए शिक्षा के लिए जरूरत के मुताबिक शिक्षा का माहौल तैयार किया जाना था।
कार्रवाई पर एसोसिएशन भी नहंीं देगी साथ
स्कूल लेक्चरर संघ के प्रधान प्रदीप शर्मा ने कहा कि डाटा अपलोड करना स्कूल मुखिया की जिम्मेवारी है। अगर कोताही बरतने पर कार्रवाई होती है तो स्कूल प्रबंधन का साथ एसोसिएशन नहीं देगी। इसके अलावा कई जगह कनेक्टिविटी की दिक्कत है। सही ढंग से इंटरनेट नहीं चल रहा है। हो सकता है कि इस कारण भी डाटा अपलोड करने में देरी हो रही है। उन्होंने स्कूल मुख्य शिक्षकों से अपील की है कि डाटा अपलोड करें। अन्यथा विभाग के समक्ष स्थिति स्पष्ट करें।