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ड्रग टेस्टिंग लैब खुलने का रास्ता साफ, एमओयू साइन

Wed, 12 Apr 2017 10:20 PM IST
सोलन, बद्दी, ब्यूरो
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फार्मा हब बीबीएन सहित प्रदेश के अन्य उद्योगों की दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए बद्दी में खुल रही ड्रग टेस्टिंग लैब ने एक और सीढ़ी पार कर ली है। - फोटो : demo
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फार्मा हब बीबीएन सहित प्रदेश के अन्य उद्योगों की दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए बद्दी में खुल रही ड्रग टेस्टिंग लैब ने एक और सीढ़ी पार कर ली है। ड्रग टेस्टिंग लैब के लिए उद्योग विभाग और नाईपर के बीच एमओयू साइन हो गया है।
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नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर फार्मास्यूटिकल एजूकेशन एंड रिसर्च (नाईपर) की ओर से डॉ. केवीएन मूर्ति और उद्योग विभाग से निदेशक राजेश शर्मा तथा संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा ने समझौता पत्र पर साइन किए। हिमाचल ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन की देखरेख में चलने वाली यह ड्रग टेस्टिंग लैब जल्द ही काम करना शुरू कर देगी।

  फार्मा टेस्टिंग लैब से अब दवाओं की टेस्टिंग के लिए फार्मा इंडस्ट्री को कहीं ओर जाने की जरूरत नहीं रहेगी। फार्मा टेस्टिंग लैब का भवन बनकर तैयार हो गया है। यहां पर उपकरण खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया चली हुई है जबकि इसमें कैथ लैब की सुविधा सहित एक्सपर्ट को बिठाने का कार्य प्रगति पर है। कुछ माह में यह ड्रग टेस्टिंग लैब काम करना शुरू कर देगी। इसके लिए नाईपर तथा उद्योग विभाग के मध्य एमओयू साइन हो चुका है। ड्रग टेस्टिंग लैब के लिए नाईपर के साथ एमओयू साइन होने से हिमाचल के युवाओं सहित उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी।
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जल्द काम करना शुरू कर देगी लैब
उद्योग विभाग के निदेशक राजेश शर्मा और संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा ने कहा कि नाईपर के साथ एमओयू साइन हो गया है। जल्द ही ड्रग टेस्टिंग लैब अपना कार्य करना शुरू कर देगी। हिमाचल ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष एमबी गोयल ने कहा कि निश्चित तौर पर फार्मा जगत के लिए ड्रग टेस्टिंग लैब एक वरदान के रूप में साबित होगी। एमओयू साइन होने के बाद यहां शेष कार्य जल्द पूरा करके इसे शुरू कर दिया जाएगा। इस अवसर पर एडीएमए के अध्यक्ष एमबी गोयल, एक्टिंग प्रेजीडेंट राजेश गुप्ता, प्रोजेक्ट मानिटरिंग एंड फार्मा टेस्टिंग लैब के चेयरमैन सतीश सिंघल, एडीएमए के कोषाध्यक्ष संजय शर्मा, सलाहकार एसएल सिंगला, उपाध्यक्ष मनीष ठाकुर, संयुक्त सचिव विवेक सिंह, फार्मा टेस्टिंग लैब के सीईओ राजेश श्रीवास्तव और अनिल अंगरिश आदि मौजूद रहे।

बाहर करवाने पड़ते हैं टेस्ट
यह ड्रग टेस्टिंग लैब खासकर छोटे फार्मा उद्योगों के लिए हितकारी साबित होगी। ड्रग टेस्टिंग लैब में महंगे उपकरणों के अभाव में उन्हें अपनी दवाओं की जांच करवाने के लिए बाहरी राज्यों की लैब पर निर्भर होना पड़ता है। कई छोटे फार्मा उद्योग ऐसे भी है, जिनके पास अपनी लैब नहीं है, उनके लिए भी यह लैब वरदान साबित होगी। इससे पूर्व चंडीगढ़, दिल्ली और हैदराबाद आदि की ड्रग टेस्टिंग लैब में दवाओं की गुणवत्ता की जांच होती है जिसमें दवाओं की कंपोजिशन और मालक्यूल आदि की जांच की जाती है।
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