सरसा नदी का पेयजल स्तर गिरने से चुनड़ी गांव में विभाग की ओर से बनाई गई राज कूहल सूख गई है। इससे 9 हजार बीघा जमीन पर लगी गेहूं की फसल मुरझाने लगी है।
70 के दशक में बद्दी और नालागढ़ की एक दर्जन पंचायतों की 9 हजार बीघा जमीन को सिंचित करने के लिए सरसा नदी से यह राज कूहल सरकार ने बनाई थी। लेकिन औद्योगिक इकाई लगने से हालात दयनीय हो गए।
यहां पर नदी नालों में अवैध खनन हुआ जिससे सरसा नदी का जल स्तर काफी नीचे चला गया। वहीं रही सही कसर इस बार मौसम ने पूरी कर दी है। मई में जो पानी की किल्लत आती थी, इस वर्ष वह फरवरी माह में ही आ गई। इसके चलते सैकड़ों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
यहां हो रही है दिक्कत
सनेड़ पंचायत के प्रधान वीरेंद्र सिंह काला, किशन पुरा के जसवंत सिंह, राम अवतार, नंबरदार कृष्ण लाल, सुंदर राम, राम स्वरूप, रामजी दास, जगतू राम, प्रेम चंद, लज्जा राम, रामरतन और विद्या रतन ने बताया कि कूहल में कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। इससे किशनपुरा, खरूणी, सनेड़, बागवानियां, खोल बैली, कसोंबवाल, खेड़ा, निक्कुवाल, करपाल पुर, गागुवाल, थांथेवाल और राजुपरा क्षेत्र के किसानों की सिंचाई सुविधा ठप हो गई है। गेहूं की फसल मुरझाने लगी है।
नदी में पानी कम होने से दिक्कत
आईपीएच विभाग ने दिनेश कुमार जेई ने बताया कि जेसीबी लगाकर बांध को ठीक कर दिया है। लेकिन नदी में पानी कम होने से किल्लत आ रही है। उन्होंने कहा कि मई में अकसर इस तरह की नौबत आती थी। लेकिन इस बार फरवरी में ही किसान परेशानी में हैं।