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अर्की अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा

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अर्की उपमंडल को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाला स्थानीय अस्पताल लंबे समय से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि अस्पताल की ओपीडी तथा विभिन्न वार्डों में दाखिल मरीजों के इलाज का जिम्मा महज 3 चिकित्सकों पर है। सात चिकित्साधिकारियों के स्वीकृत पदों को भरने के लिए स्थानीय नेताओं ने ध्यान नहीं दिया है। अर्की अस्पताल में जहां मेडिकल ऑफिसर के पांच पद रिक्त चल रहे हैं। इसमें  एक पद दंत चिकित्सक का पद भी खाली पड़ा है।  अस्पताल को एफआरयू का दर्जा तो मिला, लेकिन उस हिसाब से यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं की आज तक दरकार है। गत वर्ष मुख्यमंत्री ने अर्की अस्पताल की बिस्तर क्षमता बढ़ाने का आश्वासन दिया और इस साल सायर मेले के मौके पर यहां पर 8 करोड़ की लागत से बनने वाले भवन का शिलान्यास भी किया, लेकिन चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए आज तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। अस्पताल में महिला एवं शिशु रोग तथा मेडिसन विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को लेकर पिछले लंबे समय से क्षेत्र की जनता ने मांग उठाई। अर्की अस्पताल में आज तक विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नहीं हुए। हालत यह है कि रोगियों को अब अर्की के बजाय अन्य स्थानों पर इलाज के लिए जाने को बाध्य होना पड़ रहा है।
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बीएमओ अर्की डॉ. एसएल वर्मा ने चिकित्सकों की कमी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि संबंधित विभाग को अवगत कराया जा चुका है। उधर, अर्की के विधायक गोविंद राम शर्मा ने कहा कि अर्की सहित विस क्षेत्र के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की कमी आम समस्या बन चुकी है। इस बारे प्रदेश सरकार को ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदेश कांग्रेस कार्य समिति सदस्य एवं अर्की से प्रत्याशी रहे संजय अवस्थी ने कहा कि चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि अर्की विस क्षेत्र में शीघ्र ही डॉक्टरों की कमी दूर करने को सीएम से आग्रह किया जाएगा।
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