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Solan News: एप्पल रीप्लांट डिजीज से निपटने को भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग पर चर्चा

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एप्पल रीप्लांट डिजीज की समस्या से निपटने के लिए नौणी विवि और ऑस्ट्रेलिया स्थित ट्राई-नेशंस ऑर्च
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ट्राई-नेशंस ऑर्चर्ड सिस्टम होल्डिंग्स संभावनाएं तलाशेगा नौणी विवि
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया स्थित ट्राई-नेशंस ऑर्चर्ड सिस्टम होल्डिंग्स लिमिटेड के साथ शोध सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। इसी पहल के तहत कंपनी के वरिष्ठ सलाहकार किम रसेल ने विवि का दौरा किया। इस दौरान एप्पल रीप्लांट डिजीज पर संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम शुरू करने के उद्देश्य से प्रस्तावित समझौता ज्ञापन पर विस्तृत चर्चा हुई।
यह रोग हिमाचल प्रदेश में सेब बागानों की उत्पादकता और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है। विवि के कुलपति एचएस बवेजा ने बताया कि पुराने सेब बागानों के क्षरण और इस रोग के बढ़ते प्रभाव से किसानों की आय प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, पुराने बागों का टॉप-वर्किंग और फल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लाइट इंटर सेप्शन परीक्षण जैसे विषयों पर बात हुई। ट्राई-नेशंस ऑर्चर्ड सिस्टम होल्डिंग्स ने ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और भारत में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्राकृतिक कंपोस्टिंग और टिकाऊ बाग प्रबंधन के क्षेत्र में जानकारी दी। सेब पोमेस जैसे बागवानी उप-उत्पादों के उपयोग पर भी विचार किया गया। इसका उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
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प्रस्तावित साझेदारी के अंतर्गत उन्नत मृदा डीएनए निदान तकनीकों पर चर्चा हुई। इसमें परीक्षण प्रोटोकॉल के विकास पर भी विचार किया गया। वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान कार्यक्रमों पर भी बात हुई। एप्पल रीप्लांट डिजीज के बहु-विषयक प्रबंधन पर संयुक्त शोध भी प्रस्तावित है।
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बैठक में विवि की निदेशक अनुसंधान देविना वैद्य उपस्थित थीं। निदेशक विस्तार शिक्षा डीपी शर्मा और पौध रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष अनिल हांडा भी मौजूद रहे। संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण पीके बवेजा और संयुक्त निदेशक प्रदीप कुमार भी शामिल थे। मानिका तोमर, शालिनी वर्मा, नीना चौहान और अंजलि चौहान जैसे अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।
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