फीस काउंटर पर लंबी कतारों में खड़े तीमारदार हो रहे परेशान, कैश न होने पर वापस लौटाए जा रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
एक ओर जहां देश भर में छोटी से लेकर बड़ी दुकानों तक लोग ऑनलाइन पेमेंट (यूपीआई) का लाभ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में व्यवस्थाएं उल्टी हैं। अस्पताल के फीस काउंटर पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा बंद होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को खुले पैसों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना सैकड़ों मरीज यहां टेस्ट की फीस कटवाने के लिए आते हैं, लेकिन खुले पैसे न होने की सूरत में उन्हें काउंटर से वापस भेज दिया जाता है। अस्पताल की इस ढर्रे वाली व्यवस्था के कारण लोगों को इलाज से पहले खुले पैसों का जुगाड़ करना पड़ रहा है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को पहले पर्ची काउंटर, फिर ओपीडी, उसके बाद टेस्ट की फीस के लिए कैश काउंटर और अंत में टेस्ट करवाने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है। इतनी मशक्कत के बाद जब मरीज फीस काउंटर पर पहुंचता है, तो खुले पैसे न होने के कारण उसे कतार से बाहर कर दिया जाता है। इस वजह से न सिर्फ एक मरीज को देरी होती है, बल्कि पूरी लाइन में खड़े अन्य मरीजों का समय भी बर्बाद होता है।
पहले लगाया था क्यूआर कोड
हैरानी की बात यह है कि क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में पहले ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा शुरू की गई थी और काउंटरों पर क्यूआर कोड भी लगाए गए थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन के आपसी तालमेल की कमी के कारण इसे अचानक बंद कर दिया गया। डिजिटल युग में इस सुविधा को बंद किए जाने से अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर गरीब और दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कोट
अस्पताल में पहले यह तय नहीं हो पाया था कि ऑनलाइन पेमेंट के जरिेये आने वाला पैसा बैंक के किस खाते में ट्रांसफर होगा। इसी तकनीकी असमंजस के कारण क्यूआर कोड हटाया गया था। अब अस्पताल का एक समर्पित ऑनलाइन पेमेंट अकाउंट तैयार कर लिया गया है। काउंटरों पर जल्द ही नए क्यूआर कोड इंस्टॉल कर दिए जाएंगे, जिससे मरीजों को डिजिटल पेमेंट की सुविधा दोबारा मिलने लगेगी।
डॉ. राकेश पंवार,चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल,सोलन