मजबूरी में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी को कर रहे इस्तेमाल
पिछले दिनों में क्षेत्र में हुई सप्लाई में भी आ गए थे लंबे बाल
बावड़ी से सैंपल फेल हुए पानी को ही ले रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
परवाणू (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र परवाणू के साथ लगते टकसाल में डायरिया फैलने लगा है। लेकिन विभाग की ओर से यहां पर पीने की सप्लाई 14 दिन में एक बार हो रही है। लोगों को मजबूरी में प्राकृतिक स्रोतों से पानी भरना पड़ रहा है। ऐसे में लोग उस बावड़ी से भी पानी भर रहे हैं जिसके बीते दिनों सैंपल फेल हुए थे। लोगों के लिए पानी का अन्य कोई साधन न होने से उन्हें मजबूरी में इसी पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ऐसे में लोग डायरिया का शिकार होकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
वहीं स्लम बस्ती में रहने वाले परिवार के लोग भी टकसाल स्थित बावड़ी से ही पानी भर रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि स्लम बस्ती के लोग इस पानी स्रोत के पास ही कपड़े धोते हैं और नहाते भी हैं। वहीं जल शक्ति विभाग की ओर से दो सप्ताह में एक बार पानी की आपूर्ति देने के बाद भी बीते दिनों उसमें अधिक मात्रा में बाल भी आए थे। इसके बाद जल शक्ति विभाग को इसकी जांच करने के लिए भी निर्देश दिए थे।
गौर रहे कि टकसाल गांव दो भागों में बंटा हुआ हैं। इसमें निचले परवाणू में लगभग 500 निवासी रहते हैं। जबकि मुख्य टकसाल में करीब 2000 से 2500 लोग रहते हैं। निचले टकसाल में पानी न आने के बाद लोग टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई को मंगवाते हैं। वहीं अन्य लोग पुरानी बावड़ी पर निर्भर हैं। यहां से लोग पानी भरकर ले जाते हैं और उस पानी को पीने के लिए भी इस्तेमाल में लाते हैं। इससे बीमारियों के होने का खतरा भी बना हुआ है।
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निचले टकसाल में पानी की सप्लाई की कमी से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। मजबूरी में लोग इन दिनों बावड़ी पर निर्भर हैं। लेकिन इस बावड़ी के सैंपल फेल हो चुके हैं। लोगों के पास अन्य कोई पानी का साधन नहीं हैं।
-निशा देवी
वार्ड सदस्य, पंचायत टकसाल
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टकसाल में पानी की सप्लाई के लिए गर्मियों में हिमुडा से पानी खरीदना पड़ता है। आजकल हिमुडा ने पानी की सप्लाई कम कर दी है। जल्द ही क्षेत्र में टैंकरों के माध्यम से पानी दिया जाएगा। लोगों से आग्रह है कि पानी को 20 मिनट तक उबालने के बाद ही सेवन करें ताकि बीमारियों से बचा जा सके।
-ई. भानू उदय
सहायक अभियंता, जल शक्ति विभाग