चतुर्थ श्रेणी व स्टाफ नर्सों के पद भी खाली, 300 से ज्यादा ओपीडी होती है रोजाना
बिना चालक के एंबुलेंस कई माह से अस्पताल में खड़ी, मरीजों को नहीं मिल रही सुविधा
सुरेंद्र ठाकुर
धर्मपुर (सोलन)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धर्मपुर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है। अस्पताल में इन दिनों दो चिकित्सकों के सहारे 35 हजार की आबादी है। ऐसे में मरीजों को घंटों ओपीडी के बाहर खड़े रहना पड़ता है। अगर अस्पताल में कोई दुर्घटना या अन्य केस आ जाए तो चिकित्सकों को ओपीडी छोड़नी पड़ती है। इस कारण मरीज लाइनों में खड़े रहते हैं। हैरत की बात तो यह है कि कई बार आपात स्थिति में भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। वहीं, बिना चालक के एंबुलेंस कई माह से अस्पताल के बाहर खड़ी हुई है। इससे रेफर के दौरान मरीजों को दिक्कतें आती हैं। अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी व स्टाफ नर्सों के पद भी रिक्त पड़े हुए हैं। गौर रहे कि धर्मपुर अस्पताल कालका-शिमला नेशनल हाईवे पांच के किनारे होने के चलते अतिसंवेदनशील श्रेणी में आता है। सड़क पर जाबली से लेकर बड़ोग तक यदि कोई सड़क दुर्घटना हो जाए तो मरीजों को इसी अस्पताल लाया जाता है, लेकिन यहां आने पर पीड़ितों को परेशान ही होना पड़ता है। अस्पताल में न तो अल्ट्रासाउंड की सुविधा आपात स्थिति में मिलती और न ही टेस्ट हो पाते हैं। वहीं अस्पताल में 300 की ओपीडी प्रतिदिन है। चिकित्सकों की कमी के कारण रोगियों की जांच खंड चिकित्सा अधिकारी भी करते हैं। इसी कारण ओपीडी में लोगों को थोड़ी राहत मिल पाती है। वहीं, रात को आपात कालीन स्थिति में प्रतिनियुक्ति पर चिकित्सक को बुलाया जाता है। संवाद
अस्पताल में चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत
अस्पताल में चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत हैं, इनमें से 5 पद खाली पड़े हुए हैं। वहीं, अस्पताल में चार नर्सिंग स्टाफ के पद है। इसमें से एक नर्स प्रतिनियुक्ति पर है चतुर्थ श्रेणी व सफाई कर्मचारी के पद खाली होने से भी अस्पताल में भारी मुश्किलें आ रही है।
शव गृह का निर्माण कार्य भी अधर में लटका
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही शव गृह का निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधर में लटका हुआ है। 10 लाख रुपये की राशि से निर्माण कार्य होना है, लेकिन काफी समय से बजट ही नहीं आया है। ऐसे में निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर भी उच्चाधिकारियों के साथ पत्राचार किया जा चुका है।
कोट
चिकित्सकों की कमी के कारण रोगियों की जांच में देरी हो रही है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। उम्मीद है कि आगामी दिनों में चिकित्सकों की तैनाती हो जाएगी। दूसरी ओर अस्पताल में शव गृह का निर्माण दस लाख की लागत से किया जाना है। इसके लिए भी बजट की कमी आ रही है।
परमिंद्र सिंह,खंड चिकित्सा अधिकारी