लेही पंचायत के गांव मखनू माजरा में देवी भागवत कथा में ढोल चिमटे की तान पर भगवान का गुणगान किया गया। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भजन कभी राम बनके कभी शाम बनके और मेरी अंखियां तरस गईं गोकुल के राजा अब तो आजा गाकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कथा वाचक राम प्रताप शास्त्री ने देवी भागवत का महत्व लोगों को बताया। कहा कि राजा छत्रजीत ने सूर्य देवता की भक्ति करके मणि प्राप्त कर ली थी। यह मणि भगवान श्रीकृष्ण ने देखी ओर लेने की इच्छा जताई। राजा ने मणि देने से इंकार कर दिया। इसके बाद राजा का छोटा भाई त्रिसेन मणि को चुराकर जंगल में भाग गया। जंगल में उनका सामना शेर से हो गया। शेर ने उसका शिकार करके मणि ले ली। कुछ दिन बाद शेर भी भालू के हमले में मारा गया। भालू मणी को लेकर गुफा में चला गया। राजा को जब मणि नहीं मिली तो भगवान श्रीकृष्ण पर चोरी का आरोप लगाया।
भगवान को पता चला कि उन पर आरोप लगा है तो वह मणि खोजने के लिए जंगल गए और मणि खोज निकाली। आरोपों से निजात पाने के लिए उनके पिता वासुदेव ने देवी भागवत करवाया। वह देवी भागवत करने के बाद पंडितों को भोजन करवा ही रहे थे कि भगवान मणि लेकर पहुंच गए। तभी से देवी भागवत लोग कराने लगे। देवी भावगत के महत्व को समझाते हुए बताया कि जब भी मनुष्य पर विपत्ति पड़ती है तो भगवान को कई लीलाएं करनी पड़ती हैं।
इस मौके पर महिलाओं ने गोकुल वंशी वाले गोकुल के राजा, मेरी अंखियां तरस गई गौकुल के राजा, कभी राम बनके कभी शाम बनके भजन पेश कर संगत को झूमने पर विवश किया। इस मौके पर जीत राम, कर्मचंद नंबरदार, तरसेम चौधरी, लायक राम, दलेर चौधरी, गुरदेव ठाकुर, पंचायत उपप्रधान योगराज, लज्जा राम, रामकरण, श्रवण कुमार, गुरवचन सिंह, करनैल सिंह, बग्गा राम, हुसन चंद, दीनानाथ, रणविजय सिंह, बीडीसी उपाध्यक्ष प्यारो देवी, कमला देवी, कर्मी देवी, बलविंद्र कौर, उर्मिला, कांता देवी, नीलम और सुषमा ने भाग लिया।