सुबाथू छावनी में गहराया पेयजल संकट, लोगों का जीवन प्रभावित
बूंद-बूंद को तरस रहे स्थानीय लोग और स्कूलों में बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
सुबाथू(सोलन)। सुबाथू छावनी क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है, जिससे आम जनता और शिक्षण संस्थान प्रभावित हो रहे हैं। मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) द्वारा वर्ष 2014 से बकाया लाखों रुपये की देनदारी के कारण पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई है। इस वजह से स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए टैंकरों और पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पानी की किल्लत का सीधा असर अब सुबाथू के स्कूलों और वहां पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। स्कूलों में पानी की आपूर्ति न होने से प्रशासन और छात्रों को भारी परेशानी हो रही है। स्कूल प्रबंधन फिलहाल निजी स्तर पर पानी के टैंकर मंगवाकर काम चला रहा है। प्रबंधकों का कहना है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है। यदि पानी की यही स्थिति बनी रही, तो स्कूलों का संचालन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इससे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। स्थानीय लोग दूर-दराज के हैंडपंपों और बावड़ियों का भी सहारा ले रहे हैं। कई परिवारों को पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज पर वर्ष 2014 से लाखों रुपये की देनदारी बकाया है। इसी देनदारी के चलते छावनी क्षेत्र की पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। छावनी परिषद द्वारा एमईएस की इस पुरानी देनदारी का भुगतान नहीं किया गया है। इसी कारण जनता और बच्चों को इस भीषण किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद छावनी वासियों को बढ़े हुए वॉटर कर से राहत मिली थी। जीओसी द्वारा कर दरों को संशोधित कर साथ लगते नगर निगम से भी कम कर दिया गया था। इसके बावजूद, छावनी परिषद ने एमईएस की देनदारी का भुगतान नहीं किया। यह स्थिति पेयजल संकट को और गंभीर बना रही है।
कोट
उधर, इस बारे छावनी परिषद की अधीक्षक कुलदीप कौर ने आश्वासन दिया है कि इस मामले को जल्द ही आगामी बोर्ड बैठक में छावनी अध्यक्ष के समक्ष रखा जाएगा और बजट पास कर एमईएस के बिलों का भुगतान किया जाएगा।