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Solan News: पटवारी एवं कानूनगो संघ ने सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी, 18 सूत्री मांग पत्र जारी

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शालाघाट में पटवारी-कानूनगो संघ की राज्य स्तरीय बैठक
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संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट/अर्की (सोलन)। पटवारी एवं कानूनगो संघ ने मांगें पूरी नहीं होने पर सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है। हिमाचल प्रदेश राजस्व पटवारी एवं कानूनगो संघ ने शालाघाट में राज्य स्तरीय बैठक की।
बैठक में लाहौल-स्पीति को छोड़कर प्रदेश के 11 जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संघ ने पटवारियों और कानूनगो से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के बाद 18 सूत्री मांगपत्र जारी किया। संघ ने मांगों पर समयबद्ध निर्णय नहीं होने पर लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी दी। बैठक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रजनीश शर्मा की अध्यक्षता में हुई।
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बैठक में जिला स्तरीय कैडर और वरिष्ठता व्यवस्था में कोई बदलाव न करने की मांग की गई। संघ ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री की ओर से दिए गए आश्वासनों के अनुरूप वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखने पर जोर दिया। नए आरएंडपी नियमों में वरिष्ठता से छेड़छाड़ होने पर संघ ने राज्य स्तरीय विरोध की चेतावनी दी। बलवान कमेटी की सिफारिशों पर तीन माह के भीतर अंतिम निर्णय लेने की मांग भी उठाई गई।
बैठक में सेटलमेंट विंग के साथ मिलकर राज्य स्तर पर संयुक्त महासंघ गठित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। संघ ने वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की। 3 जनवरी 2022 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को समान कार्य, समान वेतन के सिद्धांत पर उच्च वेतनमान देने की मांग की गई। कानूनगो के वेतन संबंधी विसंगति का भी समयबद्ध समाधान मांगा गया।
पटवारी, कानूनगो और चौकीदार के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। कृषि जनगणना का पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लंबित मानदेय जारी करने की भी मांग की गई। बैंकों की ओर से मांगी जाने वाली गैर-कानूनी मौका रिपोर्ट और भारमुक्त प्रमाणपत्र पर रोक लगाने की मांग रखी गई। नायब तहसीलदार के रिक्त पदों पर कानूनगो को तदर्थ पदोन्नति देने की मांग भी शामिल है। संघ ने नव नियुक्त पटवारियों को जॉब ट्रेनी नीति से बाहर रखने की मांग की है।
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आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भी सुझाव दिए
संघ ने बीएसएनएल ब्रॉडबैंड की धीमी गति की समीक्षा करने की मांग की है। आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भी सुझाव दिए गए। तहसील स्तर पर आपातकालीन वाहन और आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने की मांग सरकार के समक्ष रखी गई। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर सरकार की ओर से समयबद्ध सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आगामी रणनीति तय कर लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
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