कम बिस्तर होने से मरीजों को जाना पड़ता है पंचकूला
हंस फाउंडेशन द्वारा अस्पताल में की जाती है डायलिसिस
अधिक मरीज होने के कारण 10 दिन तक रहती है वेटिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के सिविल अस्पताल में चल रहे डायलिसिस केंद्र में बिस्तरों की कमी हो गई है। हालात यह है कि अधिक मरीज होने के कारण वेटिंग भी दस-दस दिन की है। वहीं, अधिक पीड़ित मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को डायलिसिस करवाने के लिए चंडीगढ़, पंचकूला और रूपनगर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। डायलिसिस केंद्र में बढ़ते मरीजों को देखते हुए अब तीमारदार और समाजसेवी संस्थाओं की ओर से बिस्तरों को बढ़ाने की मांग की है।
सिविल अस्पताल नालागढ़ में हंस फाउंडेशन की ओर से मरीजों के डायलिसिस किए जाते हैं। बीबीएन में बढ़ते मरीजों को देखते हुए नालागढ़ में पूर्व एसडीएम महेंद्र पाल गुर्जर ने नवंबर 2022 में डायलिसिस केंद्र की शुरुआत की थी। यहां केवल तीन मशीनें हैं। इनमें एक दिन में केवल छह पीड़ितों के डायलिसिस हो सकते हैं। जबकि एक अन्य मशीन पॉजिटिव मरीजों के लिए है।
कम मशीनें होने के चलते मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। पहले बद्दी में भी निजी क्षेत्र में दो केंद्र चल रहे थे जहां मरीज हिमकेयर योजना के तहत डायलिसिस करवा रह थे। अब सरकार ने निजी अस्पतालों में हिमकेयर कार्ड सुविधा को बंद कर दिया है। इससे मरीजों को दिक्कत आ रही हैं। लोगों की मांग है कि प्रदेश सरकार को नालागढ़ अस्पताल में कम से कम दस मशीनें लगानी चाहिए ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
उधर, नालागढ़ अस्पताल स्थित डायलिसिस केंद्र के प्रभारी डॉ. शुभम ने बताया कि वर्तमान में केंद्र में केवल तीन मशीनें हैं। एक मशीन पर केवल पॉजिटिव मरीजों का डायलिसिस हो रहा है। सामान्य मरीजों के लिए केवल दो मशीनें हैं। वर्तमान में कुल 12 मरीज हैं जिनमें 11 सामान्य और एक पॉजिटिव मरीज है। लगभग 10 मरीज प्रतीक्षा सूची में है।