संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में यूरिया समेत अन्य जरूरी खादों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे स्थानीय किसान और बागवान परेशान हैं। इस समय बारिश से पहले और बाद में फसलों में खाद डाली जानी बेहद जरूरी थी, लेकिन बाजारों और सोसायटियों से खाद गायब है।
जिले में नकदी फसलों जैसे टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी और सेब के साथ-साथ मक्की की फसल में भी बड़े पैमाने पर खाद का प्रयोग होता है। खाद न मिलने से फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ने की आशंका है जानकारी के अनुसार हिमफेड ने अप्रैल महीने से ही लगातार खाद की मांग भेजी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे खाद तैयार नहीं हो पा रही है।
यूरिया खाद की 350 मीट्रिक टन मांग के मुकाबले सिर्फ 90 मीट्रिक टन खाद मिल पाई। वहीं अप्रैल में 150 मीट्रिक टन की मांग भेजी गई थी, जिसमें से महज 67 मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हुई। इस माह के लिए 850 मीट्रिक टन की भारी-भरकम मांग भेजी गई है, लेकिन अभी तक खाद की खेप नहीं पहुंच पाई है। यही हाल 12-32-16 खाद का भी है, जिसकी सप्लाई अप्रैल, मई और जून महीने से पूरी तरह ठप पड़ी है।
विभाग की ओर से इसकी कुल 450 मीट्रिक टन की मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन किसानों को निराशा ही हाथ लग रही है।