अदालत के शौचालय से कत्ल और लूटपाट के मामलों में शामिल खूंखार अपराधी का भाग जाना पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है। यह पहला मामला नहीं है जब कोई शातिर पुलिस की कस्टडी पर भारी पड़ा हो। इससे पहले भी अदालत में लाने और वहां से वापस ले जाने के दौरान कई कैदी भागे हैं। इसमें पुलिस की खूब फजीहत हुई थी बावजूद इसके प्रबंध वैसे नहीं किए गए जैसे होने चाहिए थे। हालांकि कई फरार कैदियों की धरपकड़ कर ली गई लेकिन कई मामलों में कैदी अभी तक नहीं पकड़े गए हैं।
इस बार कैदी शौचालय की खिड़की को तोड़कर वहां से भाग निकला। सवाल उठता है कि एक खिड़की को तोड़ने में कैदी को वक्त तो लगा होगा, ऐसे में पुलिस वाले इतने लापरवाह होकर कैसे बाहर बैठे रह गए। पुलिस के मुताबिक कैदी सुनील कुमार उर्फ सोनू पुत्र बग्गाराम, निवासी गांव कूनप्लेट, तहसील नालागढ़ के खिलाफ 5 जनवरी 2016 को नालागढ़ थाना में आईपीसी की धारा के तहत मुकदमे दर्ज हैं। कुछ मामले इसके खिलाफ ऊना में भी चल रहे हैं। इस वजह से शुक्रवार को कैदी ऊना पुलिस ही उसे नालागढ़ लाई थी।
अब पुलिस सरगर्मी से शातिर की तलाश में जुटी है। लेकिन इस वारदात से पुलिस की चौकसी की पोल खुल गई है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है कि आखिर शातिर आरोपी ने खिड़की और सलाखों को कैसे तोड़ा? शातिर के पास ऐसे उपकरण तो नहीं थे जिससे खिड़की और सरिया तोड़ना शातिर के लिए आसान? दूसरा कैदी अंदर खिड़की तोड़ रहा था तो बाहर पुलिस कर्मियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। डीएसपी साहिल अरोड़ा ने कहा कि जांच के बाद ही असलियत का पता चल सकेगा।
केस एक
वर्ष 2014 में शिमला के कंडा जेल से लाए एक कैदी लो विजिबिलिटी का फायदा उठाकर भाग गया था। नालागढ़-बद्दी हाईवे पर भुड्ड पर गाड़ी रुकने पर कैदी उतर गया और लो बिजिबिलिटी का लाभ उठाकर किसी वाहन में चढ़कर भाग निकला। कैदी मोहम्मद उस्मान खान पुत्र अजीज मोहम्मद निवासी गांव महलान, जिला पुंछ, जम्मू-कश्मीर को पुलिस के जवान कांस्टेबल धीरज और प्रवीण कुमार शिमला जिला के कंडा की जेल से नालागढ़ अदालत में पेश करने को लाए थे और वापसी जाते समय वह फरार हो गया।
केस-2
वर्ष 2013 को न्यायिक हिरासत में चल रहे कारों के शीशे तोड़कर नकदी उड़ाने वाले इंद्रजीत पुत्र राजू निवासी बिहार पुलिस कर्मियों को शौच के बहाने धक्का देकर भाग गया था। पुलिस कर्मियों को तत्काल सस्पेंड किया गया। नौकरी बचाने के लिए कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को दिल्ली से धर दबोचा गया।
केस-3-
वर्ष 2009 में ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ में ऑपरेटरों ने एक आरोपी को धर दबोचा था। यह ट्रक चोरी के मामलों में संलिप्त था। लखवीर सिंह उर्फ लक्खा नालागढ़ में ही ट्रक चलाता था और ट्रकों की चोरी में संलिप्त था। ऑपरेटरों की धरपकड़ के बाद उसे पुलिस के हवाले किया था, जिसे पुलिस लेकर पंचकूला जा रही थी। वह पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया। इसमें दो पुलिस कर्मी सस्पेंड हुए थे। आरोपी कई माह बाद दबोच लिया था।
केस-4-
वर्ष 2008 में कंडा जेल को रामपुर से ला रहे एक हरियाणा के कुख्यात अपराधी पुलिस कर्मियों को नशीला पेय पिला फरार हो गया था। कंडा जेल से पूर्व ही आरोपी ने पुलिस कर्मियों को नशीला पेय पिला दिया और पुलिस कर्मियों ने जब होश संभाला तो वह नालागढ़ के रामशहर के पास ही जंगल में अकेले पड़े थे। आसपास के लोगों ने पुलिस की वर्दी देखने के बाद रामशहर थाने को सूचना दी और दोनों ही पुलिस कर्मी नशे में बेसुध थे।