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शिल्ली में बगीचा लगाने को काट डाले 129 पेड़

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सोलन। सेरी पंचायत के शिल्ली गांव में निजी भूमि पर बिना इजाजत के 129 पेड़ों को काट दिया है। बड़ी संख्या में काटे गए इन पेड़ों में चीड़ और इमारती लकड़ी में इस्तेमाल होने वाले दूसरे पेड़ भी शामिल हैं। इन पेड़ों को लंबे समय से काटा जा रहा था लेकिन वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। बगीचा लगाने के नाम पर काटे गए इन पेड़ों पर जमीन के मालिक ने पॉलीहाउस का निर्माण भी कर दिया था। मालिक यहां नया बगीचा लगाने की तैयारी में था। इस बीच किसी ने वन विभाग को पेड़ काटने की सूचना दे दी।
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विभाग ने मौके पर पहुंचकर सभी पेड़ों को कब्जे में लेकर जमीन मालिक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। निजी भूमि पर बिना इजाजत पेड़ काटने का सोलन में यह दूसरा मामला है। इससे पूर्व कुंदला गांव में निजी भूमि पर बिना इजाजत बिल्डर ने 93 पेड़ काट डाले थे। इस संबंध में वन विभाग ने पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज करवाई थी। लेकिन अभी तक इस मामले में कोई बड़ा खुलासा नहीं हो पाया है। अब यह एक और मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार पिछले करीब 12 दिन से पेड़ काटने का काम चल रहा था। बगीचे की सफाई के नाम पर दर्जनों पेड़ों को काट दिया है। वन विभाग इन पेड़ों की गिनती में जुटा है और प्राथमिकी दर्ज करवाने की बात कही है।

थाना प्रभारी करेंगे मामले की जांच : एएसपी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार ने बताया कि वन विभाग ने 129 पेड़ काटने की शिकायत पुलिस में दी है। इस आधार पर छानबीन की जा रही है। मामला सदर थाना के तहत पंजीकृत किया है और थाना प्रभारी को जांच का जिम्मा सौंपा है। छानबीन के आधार पर केस आगे बढ़ाया जाएगा। मौके पर जाकर छानबीन की जाएगी और आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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पुलिस को दी है मामले की सूचना : आरओ
वन विभाग के आरओ दौलत राम धीमान ने कहा कि विभाग को पेड़ काटने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर मौके पर पहुंचकर मामले की छानबीन की गई। इसके बाद भारी संख्या में पेड़ काटे हुए पाए गए हैं। वन विभाग ने इस संबंध में पुलिस को मामले की सूचना दे दी है। अब इस मामले में वन विभाग और पुलिस मिलकर आगे की कार्रवाई करेगी। जमीन के मालिक ने किसी तरह की इजाजत नहीं ली थी।

वन विभाग पर उठ रहे सवाल
शिल्ली में करीब दो सप्ताह में 129 हरे पेड़ काटे जाने के बावजूद वन विभाग को मामले की भनक तक न लगने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इससे पूर्व भी वन विभाग को निजी भूमि पर 93 पेड़ काटने की भनक तीन दिन बाद ग्रामीणों की सूचना पर लगी थी। वन विभाग ने दोनों जगह से लकड़ी को कब्जे में ले लिया है। ऐसे में वन विभाग की लापरवाही पर सवाल उठने लगे हैं।
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