सोलन। गुनाह से सने कैदियों के हाथ अब मेहनत करना सीख चुके हैं। कैदी केंचुआ खाद बनाने से लेकर तमाम तरह के कार्यों को अब बखूबी कर रहे हैं। इन्हें मुख्य धारा में लाने का प्रयास सोलन पुलिस कर रही। गुस्से और तैश में आकर जुर्म कर बैठे इन लोगों को सुधारने की कवायद रंग लाने लगी है। कैदी केंचुआ खाद ही नहीं बल्कि ब्रेड और बंद तक बनाना सीख चुके हैं। इन पदार्थों को बेचकर कैदी कमाई भी कर रहे हैं।
जिला उप कारागार सोलन की दीवारों के भीतर कैदियों को सुधारने की यह कवायद सिरे चढ़ती नजर आ रही है। जेल की दीवारों पर हुई सुंदर चित्रकारी और बाजारों में बिक रही ब्रेड तथा बंद का स्वाद चक आम लोग कैदियों के हुनर को अंदाजा लगा सकते हैं। कैदियों में सुधार लाने के लिए जेल प्रबंधन कई तरह की गतिविधियां आयोजित करता रहता है। इसमें अनुशासन से रहना भी सिखाया जाता है। उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उनके लिए जेल के अंदर ही सुक्ष्म उद्योग स्थापित किए हैं। जेल में कैदी केंचुआ खाद्य तैयार कर रहे हैं साथ ही ब्रेड भी बनाते हैं। दिवारों पर चित्रकला करने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वर्तमान में सोलन उपकारागार में 131 कैदी है। इसमें 05 महिलाएं भी शामिल हैं। इसमें से आठ ओपन जेल में रहते हैं। इनके सुधारीकरण और इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें जहां कैदियों को केंचुआ खाद बनाने का कार्य सिखाया गया है। इसके सफल प्रशिक्षण के बाद अब जेल से केंचुआ खाद्य को बेचने का कार्य भी किया जाता है। महिला कैदियों को स्वेटर, टोपियां, जुराबें और अन्य वस्तुओं को बनाना सिखाया
जाता है।
सब्जियों के व्यर्थ पदार्थ से बन रही खाद
सोलन कारागार में कैदी सब्जियों के व्यर्थ पदार्थों को एक जगह एकत्रित कर केंचुआ खाद्य तैयार करते हैं। इसका वह अब व्यापार भी करने लग गए हैं। इसके अलावा कैदियों द्वारा स्वयं भी जेल परिसर में खाली स्थानों पर छोटी मात्रा में खेत बनाकर उसमें साग, धनिया, मटर और लहसुन सहित अन्य फसलों को लगाते हैं। इन फसलों में से निकलने वाले व्यर्थ पदार्थों को केंचुआ खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें तैयार खाद्य को पांच और एक किलो की पैकिंग में पैक किया गया। इसमें पांच किलो पैक्ट का मूल्य 100 रुपये जबकि एक किलो का 25 रुपये रखा है।
आठ कैदी जेल से बाहर करते हैं काम
सोलन जेल में आठ कैदी ओपन जेल के तहत रहते हैं। यह जेल से बाहर जाकर अपना कारोबार और दिहाड़ी का कार्य करते हैं। सुबह जेल से निकल जाते हैं और शाम को काम करके लौट आते हैं। ऐसे कैदियों को उनके अनुशासन के अनुसार कोर्ट द्वारा ओपन जेल में भेजा जाता है।
कैदियों के सुधार के लिए उठा रहे कदम : कुमार
जेल के सहायक अधीक्षक देवेश कुमार ने बताया कि जेल में कैदियों के सुधारीकरण और उन्हें व्यस्त रखने के लिए कार्य सिखाए जाते हैं। जेल से छूटने के बाद वह अपने परिवार की गुजर बसर कर सकते हैं। कैदियों को ब्रेड और बंद बनाना भी सिखाया जाता है। इसके अलावा केंचुआ खाद भी तैयार करके बेची जा रही है।