फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटे के अंग दान करने की इच्छा नहीं हो सकी पूरी

विज्ञापन
अमर उजाला - फोटो : amarujala
विज्ञापन
सोलन। मेरा बेटा बीस साल का था.. उसे मैं इंजीनियर बनते देखना चाहता था। लेकिन विश्वविद्यालय की लाचार व्यवस्था उसे निगल गई। यह हालात किसी दूसरे छात्र के साथ नहीं होने चाहिए। मेरा बेटा पढ़ाई में कमजोर था या वो कक्षा में नहीं जा रहा था तो इसकी जानकारी परिवार को क्यों नहीं दी गई? अब ताउम्र इस गम के साथ ही जीना पड़ेगा। काश, बेटे को बड़ा नाम देखकर युनिवर्सिटी में न भेजा होता। अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर खड़ा पिता बार-बार उस घड़ी को कोस रहा था जब उसने बेटे को कुछ बनाने के लिए युनिवर्सिटी भेजा था। जो बेटा कुछ सालों बाद परिवार का सहारा बन सकता था उसका शव पोस्टमार्टम के लिए करीब एक घंटे तक पड़ा रहा और परिजन बाहर इंतजार करके आंसू बहाते रहे।
विज्ञापन

अनमोल ठाकुर परिवार का इकलौता चिराग था। उसके पिता राकेश ठाकुर ने उसके अंग दान करने की पेशकश अस्पताल के सामने रख दी। राकेश ठाकुर ने कहा कि वे अपने बेटे के अंगदान के इच्छुक हैं ताकि किसी जरूरतमंद के काम आ सकें। लेकिन सोलन अस्पताल में ऐसी व्यवस्था न होने की वजह से यह पेशकश भी पूरी नहीं हो सकी। सुबह करीब पौने ग्यारह बजे अनमोल की मौत का हल्ला युनिवर्सिटी में पड़ गया था। लेकिन पुलिस के पहुंचने में देरी और उसके बाद अस्पताल में डॉक्टर मिलने में समय लगने की वजह से पोस्टमार्टम शाम पांच बजे हो पाया। इस दौरान छात्र के माता-पिता व चचेरा भाई अस्पताल में ही मौजूद थे।
शैक्षणिक संस्थान में आत्महत्या का यह दूसरा मामला है। इससे पूर्व 22 दिसंबर को कसौली में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई कर रहे दसवीं के छात्र ने परीक्षा के दौरान आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने छात्र की मौत पर खूब हंगामा किया था और पोस्टमार्टम के लिए शव को शिमला ले गए। लेकिन स्कूल प्रबंधन आखिर तक इस मामले को आत्महत्या करार देता रहा। छात्र ने स्कूल में छुट्टियां पड़ने से ठीक कुछ समय पहले ही यह कदम उठाया था। छात्र की मौत के बाद अध्यापकों ने उसे होनहार छात्र बताया था और सीसीटीवी फुटेज पुलिस को दिए थे। जेपी युनिवर्सिटी मामले में छात्र ने ठीक उस समय आत्महत्या की जब उसके परिजन उससे मिलने आ रहे थे। जबकि युनिवर्सिटी के अनुसार उसका नाम जुलाई में ही काट दिया गया था।
विज्ञापन

पुलिस अधीक्षक मोहित चावला का कहना है कि पुलिस ने भादंसं की धारा 174 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगामी छानबीन की जा रही है। मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
बीटेक के छात्र अनमोल के पिता राकेश ठाकुर अपने बेटे के अंग दान करना चाहते थे। लेकिन सोलन अस्पताल में ऐसी सुविधा न होने की वजह से यह मुनासिब नहीं हो पाया। राकेश ठाकुर ने बताया कि उनका बेटा बीस साल का था और वे उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन विश्वविद्यालय की लाचार व्यवस्था ने उनके बेटे को निगल लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें