नालागढ़ के ढांग निहली में बारिश के बाद हरे भरे हुए गेहूं के खेत- स्रोत- ग्रामीण।
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इस बार बीबीएन में अच्छी पैदावार होने की उम्मीद,सभी किसानों ने 15 नवंबर से पहले की था बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बारिश के बाद अब किसानों ने गेहूं की फसल में यूरिया खाद डालनी शुरू कर दी है। इससे गेहूं के दानों की बढ़ोतरी में मदद मिलेगी। इस बार किसानों ने 15 अक्तूबर के बाद गेहूं की बिजाई शुरू की थी और 15 नवंबर से पहले सभी किसानों ने अपनी फसल लगा दी थी। बारिश के बाद अब किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है। सितंबर महीने में भी हुई बारिश के कारण किसानों ने अक्तूबर अंत में गेहूं की बिजाई शुरू कर दी थी और 15 नवंबर तक सभी ने अपनी बिजाई पूरी कर ली थी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 15 नवंबर के बाद गेहूं की बिजाई में देरी होती तो एक हेक्टेयर में एक क्विंटल गेहूं की पैदावार कम हो जाती, लेकिन इस बार किसानों ने समय पर बिजाई कर ली है। अब बारिश के बाद खेतों में नमी बनी हुई है और धूप खिलने पर किसान यूरिया डालने में जुट गए हैं। बीबीएन क्षेत्र में लगभग 6,500 हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। किसान अवतार सिंह, अमर सिंह ठाकुर, विनोद ठाकुर, सुरमुख सिंह और सदा राम का कहना है कि बारिश देर से हुई, लेकिन अब जो बारिश हुई है, उससे किसानों को अच्छा फायदा होगा। अब धूप निकलने पर किसान यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं।
कोट
बारिश के बाद यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है। जितना जल्दी यूरिया डाला जाएगा, उतनी फसल में बढ़ोतरी होगी। अगर खाद की छिड़काव में देरी की जाती है, तो दाना छोटा पड़ सकता है और तने में ज्यादा अतर लग सकता है। जिन किसानों की गेहूं 35 दिन पुरानी हो गई है, वे अब खरपतवार नाशक दवाओं का भी छिड़काव कर सकते हैं।
डॉ. संदीप गौतम,विशेषज्ञ,कृषि विभाग