संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला भर में 0-12 साल के बच्चों में खांसी, जुकाम, बुखार समेत गला दर्द होने के मामले कम हो गए हैं। इसके चलते अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
कोरोना वायरस का प्रकोप कम होने के बाद अचानक बच्चों में वायरल के मामले बढ़ने शुरू हो गए थे। वायरल के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने देखा था कि जो बच्चा एक बार वायरल की चपेट में आ रहा है, वह ठीक होने के बाद कुछ दिनों में ही फिर पीड़ित भी हो रहा है।
इसके बाद महकमे की चिंताएं बढ़नी शुरू हो गई थी और अभिभावक परेशान हो रहे थे। अब बच्चों में वायरल के मामले अस्पतालों में 60 फीसदी तक कम हो गए हैं। विभाग ने इन दिनों बढ़ रही ठंड के बीच बच्चों को वायरल से बचाने की एडवाइजरी जारी की है।
इन दिनों अस्पतालों में शिशु रोग ओपीडी कम हो गई है। वायरल और निमोनिया मामले कम होने के बाद अस्पताल के वार्ड भी दाखिले कम हो गए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कमर कसी हुई है।
इसी के साथ बच्चों में टौंसिल की शिकायत भी नहीं आ रही है। जिला भर में शिशु रोग विशेषज्ञ ठंड में बच्चों में होने वाली बीमारियों को लेकर अलर्ट हैं। इसी के साथ जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों को घर-घर जाकर बच्चों को सर्दी में होने वाली बीमारियों के बचाव के बारे में जागरूक कर रही है।
इसी के साथ बच्चों को टोंसिल से बचाव के लिए बाहरी खाना न खाने के साथ जंक फूड न खाने का आग्रह भी कर रही है। सोमवार को क्षेत्रीय अस्पताल में शिशु रोग ओपीडी में वायरल से इक्का-दूक्का पीड़ित बच्चे ही इलाज के लिए पहुंचे। वहीं दिन भर 50 बच्चों को ही अलग-अलग बीमारियों के उपचार के लिए पहुंचे।
वायरल और डेंगू से लोग हो रहे पीड़ित
बच्चों के अलावा जिला में वायरल और डेंगू से लोग पीड़ित हो रहे हैं। इसके चलते अस्पताल की मेडिसन ओपीडी और जनरल ओपीडी के बाहर अधिक भीड़ सोमवार को रही। डेंगू के मामले फिर बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। सोमवार को डेंगू के जिला भर में 13 मामले आए हैं।
वायरल के मामलों में आई कमी : चिकित्सक
बच्चों में वायरल के मामले काफी कम हो गए हैं। अब अस्पताल में इक्का-दुक्का मामले ही आ रहे हैं लेकिन अभिभावकों को अलर्ट रहना पड़ेगा। ठंड में फिर वायरल बढ़ना सकता है। इसी के साथ बच्चों की छाती भी जम सकती है जिसका उपचार जरूरी है। बच्चों के बीमार होने पर चिकित्सक सलाह के बाद ही दवाई दें।
-डॉ. धर्मेंद्र कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक सोलन अस्पताल