विद्युत परियोजनाओं में ब्लास्टिंग से होने वाली कंपन का पहाड़ों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
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विद्युत परियोजनाओं में ब्लास्टिंग से होने वाली कंपन का पहाड़ों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह दावा बाहरा विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में आए विशेषज्ञों ने किया। संगोष्ठी का आयोजन विवि के स्कूल ऑफ मेकेनिकल इंजीनियरिंग ने करवाया। संगोष्ठी का विषय जल विद्युत प्रौद्योगिकी रहा। इसमें विशेषज्ञों ने विस्फोट से पैदा कंपन के नकारात्मक प्रभाव के दावों को खारिज कर दिया।
एसजेवीएनएल के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एचके शर्मा ने हाइड्रो पावर परियोजनाओं के कारण बाढ़ के दावों को नकारा। कहा की बाढ़ प्राकृतिक है और जल विद्युत परियोजनाओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना न्यायोचित नहीं। कहा कि जल विद्युत प्रौद्योगिकी ऊर्जा का एक स्वच्छ स्रोत है। हमारी अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसको प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य जल विद्युत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चुनौतियों और अवसरों पर शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, छात्रों तथा सरकार के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना था।
कुलपति प्रोफेसर डॉ. दलजीत सिंह ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने पर बल दिया। इस दौरान साथी सामरिक परामर्श समूह के जिरकपुर संस्थापक निखिल वसंत और इंडो-कैनेडियन कंसल्टेंसी के वरिष्ठ अभियंता गौरव शर्मा ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। रजिस्ट्रार प्रोफेसर रवि मनुजा, डीन और बाहरा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्षों भी संगोष्ठी में अपने विचार रखे।
कैरियर की अपार संभावनाएं
प्रो चांसलर डॉ. एसके बंसल ने जल विद्युत प्रौद्योगिकी में तकनीकी विकास और अनुसंधान की जरूरत पर बल दिया। कहा कि जल विद्युत प्रौद्योगिकी सिविल, मेकेनिकल, इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर और पर्यावरण प्रौद्योगिकी को-मेल हैं। छात्रों के लिए यह प्रासंगिक विषय है। इसमें कैरियर की अपार संभावनाएं हैं।
बिजली के लिए एक चौथाई पानी का दोहन
हिमाचल में भारी जल विद्युत उत्पादन की गुंजाइश है लेकिन भौगोलिक चुनौतियों के चलते पनबिजली परियोजनाओं का निर्माण आसान नहीं। इसी कारण अभी तक केवल एक चौथाई क्षमता का ही दोहन हो पाया है।